तालिबानी आतंकवादी एहसान को 2017 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जनवरी 2020 में एक तथाकथित सुरक्षित पनाह-गाह से फरार हो गया था। जहां उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी द्वारा रखा गया था। उसकी गिरफ्तारी और फरारी दोनों की परिस्थितियों को लेकर विवाद बना हुआ है। भागने के बाद से एहसान ने उसी ट्विटर अकाउंट के जरिए पाकिस्तानी पत्रकारों के साथ संवाद किया था, जिससे उर्दू उर्दू भाषा में धमकी दी गई थी। उसके कई ट्विटर अकाउंट रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर को बंद कर दिया गया है।
आर्मी स्कूल पर हमले में भी था शामिल
एहसान के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पाकिस्तानी सेना के पब्लिक स्कूल पर 2014 में किया गया एक भयावह हमला भी है। इसमें बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो गई थी। कुल मिलाकर 134 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा आतंकी पर स्वात घाटी में मलाला युसुफजई के ऊपर हमला करने का भी आरोप है।