समय के साथ अफगानिस्तान में वित्तीय संकट भी गहराएगा। नतीजनत वो पैसे के लिए आंतक का रास्ता चुनेगा और इसके लिए वो दुनियाभर में जिहाद को फैलाने की भी कोशिश करेगा, क्योंकि उसके पास आय का दूसरा विकल्प नहीं है।
माइकल बताते हैं कि तालिबान ने सरकार में हक्कानी नेटवर्क को जगह देकर संदेश दे दिया है। सिराजुद्दीन हक्कानी के पास पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हक्कानी का अलकायदा से भी संबंध रहा है और सिराजुद्दीन अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड सूची में शामिल है। इसके साथ ही वो वैश्विक आतंकी भी घोषित किया गया है।
क्रूरता है हक्कानी नेटवर्क की पहचान
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने जब अफगानिस्तान में कदम रखा तो हक्कानी ने उसके लिए काम किया और विरोधियों को क्रूरता से मारने, सिर कलम करने का काम किया। यही नहीं उसने क्रूरता के वीडियो भी जारी किए, जिससे संदेश जाए कि आतंक के खिलाफ आवाज उठाने वालों का यही हश्र होगा। दुनिया को इस सरकार की इस क्रूरता को कभी नहीं भूलना होगा।
यह है हक्कानी नेटवर्क
सुन्नी इस्लामिस्ट हक्कानी नेटवर्क की स्थापना वर्ष 1970 में हुई थी। नेटवर्क ने सोवियत संघ द्वारा पोषित अफगानिस्तान से 1980 में लड़ाई लड़ी थी। इसके बाद नेटवर्क ने आत्मघाती हमलावर के रूप में पहचान बनाई और हजारों लोगों की मौत का कारण बना।
वर्ष 2008 में काबुल के सेरेना होटल हुए बम ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता था। 2011 में काबुल के अमेरिकी दूतावास में बम धमाका कर 16 अफगानी नागरिकों की जान ली थी और बीस घंटे तक दूतावास बंद था।
ताकत का गलत इस्तेमाल करेगा हक्कानी
माइकल कहते हैं कि हक्कानी नेटवर्क बड़े स्तर पर वर्षों से आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए जाना जाता रहा है। अब सुरक्षा की बागडोर ही उसके पास है। ऐसे में अंदाजा लगा सकते हैं कि नेटवर्क अपनी ताकत का कैसे इस्तेमाल करेगा।
आने वाला समय कठिन
अफगान शांतिवार्ता दल के सदस्य नादर नादेरी का कहना है कि तालिबान की छत्र छाया में आतंकियों को शक्ति मिल गई है। ये लोग ताकत का गलत इस्तेमाल जरूर करेंगे। दुनियाभर में अशांति का माहौल होगा।