सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अब ताइवान अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब तक ताइवान को सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (पूर्व निर्मित डिजाइन के मुताबिक निर्माण) के क्षेत्र में बड़ी ताकत समझा जाता था। लेकिन मूल डिजाइन तैयार करने की उसकी क्षमता भी अब तेजी से बढ़ी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ताइवान के उदय में हालांकि अमेरिका का योगदान भी है, लेकिन अब वहां चिंता पैदा हो रही है। सेमीकंडक्टर्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन से लेकर कार और राइस कुकर्स तक में होता है। कई अमेरिकी विशेषज्ञों के मुताबिक इतने महत्वपूर्ण उत्पाद को लेकर दुनिया की ताइवान पर बढ़ रही निर्भरता ठीक नहीं है।
उच्च गुणवत्ता वाले चिप के निर्माण के लिए डिजाइन की उन्नत क्षमता जरूरी मानी जाती है। इस मामले में अमेरिका का वर्चस्व रहा है। उसकी प्रमुख चिप निर्माता कंपनियों में क्वैलकॉम, ब्रॉडकॉम, एनविडिया और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज शामिल हैं। अमेरिका 1980 के दशक में ही चिप निर्माण में अग्रणी बना और तब से उसने अपनी ये हैसियत कायम रखी है। अमेरिकी कंपनियों ने चिप डिजाइन में आविष्कार को अपने ही हाथ में रखा, लेकिन डिजाइन फैब्रिकेशन कर चिप उत्पादन का काम एशियाई कंपनियों को देने लगीं। खासकर जापान, दक्षिण कोरिया, और ताइवान की कंपनियों को ये काम दिया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ताइवान ने अब सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के हर पहलू में दखल जमा लिया है। ताइपे स्थित मार्केट इंटेलिजेंस एंड कंसल्टिंग इंस्टीट्यूट के उप महानिदेशक क्रिस हुंग के मुताबिक कई ताइवानी कंपनियां अब चिप डिजाइनिंग के काम में महारत हासिल कर रही हैं। ताइवानी विशेषज्ञता इस हद तक बढ़ी है कि अब कुछ बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रमुख भी ताइवानी मूल के अधिकारी हैं। ये कंपनियां हैं- एनविडिया, एएमडी और शिनलिन्क्स। इसका मतलब यह हुआ कि आज दुनिया में चिप डिजाइन करने वाली सबसे बड़ी दस कंपनियों में सात के प्रमुख ताइवान में जन्मे व्यक्ति हैं।
बताया जाता है कि चीन की सेमीकंडक्टर कंपनियों की नजर अब ताइवानी कंपनियों पर है। अंदेशा जताया गया है कि ये कंपनियां ताइवानी कंपनियों को खरीद सकती हैं या उनमें अपनी शेयरहोल्डिंग बढ़ा सकती हैं। चीन ताइवानी चिप का सबसे बड़ा बाजार बन कर उभरा है। इसलिए दोनों जगहों की कंपनियों के बीच संबंध मजबूत हुए हैं।
कोरोना महामारी के दौरान सप्लाई चेन में बड़ी बाधा के कारण बीते दो वर्षों से दुनिया चिप की कमी का सामना कर रही है। इसलिए इस इंडस्ट्री पर सबकी नजर रही है। इसीलिए ताइवानी कंपनियों की नई कामयाबी दुनिया भर में बड़ी खबर बनी है।