चीनी के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
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चीन और ताइवान के बीच पिछले कुछ समय से तनाव जारी है। ताइवान की तरफ से बार-बार इस बात की आशंका जताई गई है कि चीन उसपर कभी भी हमला कर सकता है। इसी बीच ताइवान ने चौंकाने वाला कदम उठाया है। ताइवान ने अपने समुद्री तटों पर एंटी लैंडिंग स्पाइक लगा दिए हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान ने ऐसा सुरक्षा की दृष्टि से किया है। दरअसल, एंटी लैंडिंग स्पाइक एक तरह से लोहे की नुकीली छड़ें होती हैं। ताइवान ने इन एंटी लैंडिंग स्पाइक को किनमेन द्वीप के समुद्री तटों पर लगाया है। जिससे कि चीनी सेना समुद्री रास्ते से वहां न पहुंच सके।
केवल इतना ही नहीं ताइवान ने स्पाइक्स से कुछ ही दूरी पर टैंक भी तैनात कर दिए हैं। ये काफी दूर से साफ दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार ताइवान में इस तरह की चर्चा है कि ऐसा भी हो सकता है कि समुद्री तट पर कोई स्मारक बनाया जा रहा हो। फिलहाल चीन और ताइवान के बीच तनाव चरम पर है।
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दोनों के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब फिजी में दोनों देशों के राजनयिकों के बीच हाथापाई हो गई। वहीं अमेरिका ने ताइवान को हार्पून पावर देकर उसकी ताकत को कई गुना तक बढ़ा दिया है। अमेरिका ने ताइवान के साथ एक सैन्य समझौता किया है। इसके तहत अमेरिका ताइवान को 60 करोड़ डॉलर के सशस्त्र ड्रोन बेच रहा है।
ऐसा माना जा रहा है कि ताइवान को अमेरिका से हथियार मिलने के बाद अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेबिन ने कहा था कि अमेरिका को ताइवान से सैन्य समझौता रद्द कर देना चाहिए। ताइवान चीन का हिस्सा है और हम इसमें किसी भी विदेशी ताकत की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
प्रवक्ता वांग ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने के समझौते को रद्द नहीं करता है तो इससे चीन और अमेरिका के रिश्ते खराब होंगे। साथ ही ताइवान और चीन की शांति प्रभावित हो सकती है। अमेरिका की हार्पून मिसाइल बेहद शक्तिशाली मानी जाती है। यह जमीनी लक्ष्यों के साथ ही युद्धपोतों को तबाह करने में सक्षम है।