अमेरिकी न्याय विभाग ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर बयान जारी कर कहा है कि 'तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण उन छह अमेरिकियों और कई अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मुंबई के जघन्य हमले में मारे गए थे।'
मुंबई हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने बयान जारी किया है। इस बयान में अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि यह मुंबई हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है। तहव्वुर राणा को लेकर एनआईए की एक टीम गुरुवार शाम ही भारत पहुंची हैं। जहां तहव्वुर राणा को दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से राणा को 18 दिन की एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है।
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बयान में कहा गया है कि तहव्वुर राणा ने डेविड हेडली को भारत का वीजा दिलाने और मुंबई में आतंकी हमले की जगहों की रेकी करने में मदद की थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि तहव्वुर राणा और डेविड हेडली की बातचीत में राणा ने कहा था कि भारतीय ऐसे हमले के हकदार हैं। इतना ही नहीं उसने मुंबई में हमला करने वाले आतंकियों की तारीफ की थी और उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य सम्मान निशान ए हैदर दिलाने की भी मांग की थी।
अमेरिकी न्याय विभाग ने क्या कहा
अमेरिकी न्याय विभाग ने बयान में कहा है कि 'अमेरिका ने बुधवार को आतंकवादी तहव्वुर हुसैन राणा, जो एक कनाडाई नागरिक और पाकिस्तान का मूल निवासी है, को भारत प्रत्यर्पित कर दिया है। साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में उसकी कथित भूमिका से जुड़े 10 आपराधिक आरोपों में मुकदमे का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित किया गया है। तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण उन छह अमेरिकियों और कई अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मुंबई केजघन्य हमले में मारे गए थे। 9 अप्रैल को अमेरिकी मार्शल सेवा ने राणा को भारत ले जाने के लिए भारतीय अधिकारियों को सौंपा। राणा का प्रत्यर्पण अब पूरा हो गया है।'
एनआईए ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर कही ये बात
एनआईए की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, 'राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है। कई वर्षों की कानूनी लड़ाई और दोनों देशों के बीच लगातार प्रयासों के बाद यह प्रत्यर्पण संभव हो पाया।' तहव्वुर राणा को अमेरिका में भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत हिरासत में लिया गया था। उसके खिलाफ भारत की तरफ से जारी किए गए प्रत्यर्पण वारंट के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई। राणा ने अमेरिकी अदालतों में कई अपीलें दायर कीं ताकि वो प्रत्यर्पण से बच सके, लेकिन अंततः उसे सभी कानूनी विकल्पों में असफलता मिली। इसके बाद अमेरिका सरकार ने भारत को राणा को सौंपने की अनुमति दी।