लीबिया में एक बार फिर से युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। त्रिपोली में लड़ाई चल रही है। जिसके कारण ट्यूनिशिया में स्थित भारतीय दूतावास की सुरक्षा में तैनात 15 सीआरपीएफ कंटीनजेंट को वहां से हटा लिया गया था। इसकी जानकारी खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दी। जिसके बाद जाविद इकबाल नाम के एक यूजर ने उनसे इसके बारे में सवाल पूछा था।
सुषमा स्वराज ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'लीबिया में परिस्थिति एकदम से बदतर हो गई हैं। त्रिपोली में लड़ाई चल रही है। ट्यूनिशिया में स्थित भारतीय दूतावास ने 15 सीआरपीएफ जवानों के पूरे कंटिनजेंट को वहां से निकाल दिया है। मैं ट्यूनिशिया में मौजूद भारतीय दूतावास द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य की सराहना करता हूं।'
स्वराज के ट्वीट पर जाविद इकबाल नाम के यूजर ने सवाल पूछा। उन्होंने कहा, 'मैं आपकी पोस्ट का मतलब नहीं समझा। ट्यूनिशिया के दूतावास का त्रिपोली में हो रही लड़ाई से क्या लेना-देना है। मैडम मुझे आपको यह बताने के लिए विवश होना पड़ रहा है कि ट्यूनिशिया वह देश है जिसकी सीमा लीबिया से लगती है।'
अपने दूसरे ट्वीट में विदेश मंत्री ने कहा, 'ट्यूनीशिया में भारतीय राजदूत के पास लीबिया का समवर्ती प्रभार है। सीआरपीएफ कंटिनजेंट को त्रिपोली में पीस कीपिंग फोर्स (शांति सेना) के तौर पर तैनात किया गया है। त्रिपोली में संकट से गुजर रहे भारतीय मिस्टर मेहताब से +218916320278, मिस्टर मुस्तफा से +218924201771 या +218912146640 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।'
बता दें कि लीबिया के सशस्त्र बागी ताकतवर नेता जनरल खलीफा हफ्फार की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुट्रेस से हुई मुलाकात के बेनतीजा रहने के बाद जनरल ने अपनी सेनाओं को त्रिपोली कूच का आदेश दे दिया। उनकी सेनाएं राजधानी से 50 किलोमीटर दूर पहुंच चुकी हैं जहां संघर्ष जारी है।
सबसे प्रमुख बात यह है कि हफ्फार ने अपनी सेना लीबियन नेशनल आर्मी को त्रिपोली पर चढ़ाई का आदेश उस वक्त दिया जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुट्रेस खुद यहीं मौजूद थे। जनरल हफ्फार ने ऐलान किया है कि आतंकवाद के खत्म होने तक उनका यह अभियान अब जारी रहेगा, जबकि राजधानी त्रिपोली में फिलहाल लीबिया की वैश्विक मान्यता प्राप्त सरकार पहले ही काम कर रही है।