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लोकतंत्र पर सर्वे रिपोर्ट: अधिकांश भारतीय चाहते हैं मजबूत नेता; 9 देशों में अल्पसंख्यक अपनी सरकार से असंतुष्ट

Fri, 12 Apr 2024 06:11 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, लंदन।

सार

International IDEA Survey Report: सर्वे में अधिकांश देशों के मतदाता अपनी सरकारों से असंतुष्ट थे, लेकिन भारत और तंजानिया के लोगों को अपने संस्थानों पर भरोसा है और वे अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं। 17 देशों में आधे से कम लोग अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं जबकि भारत में 59 और तंजानिया में 79 फीसदी लोग अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं।
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भारत का लोकतंत्र (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारत में ज्यादातर लोग मजबूत नेता के पक्ष में हैं और मौजूदा सरकार के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं। भारत, अमेरिका, डेनमार्क, इटली, ब्राजील, पाकिस्तान और इराक समेत 19 देशों के मतदाताओं के बीच किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। इनमें दुनिया के तीन सबसे बड़े लोकतंत्र शामिल हैं। अन्य देशों में ताइवान, चिली, कोलंबिया, गाम्बिया, लेबनान, लिथुआनिया, रोमानिया, सेनेगल, सियरा लियोन, सोलोमन आइलैंड, दक्षिण कोरिया और तंजानिया हैं।
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गुरुवार को जारी सर्वे रिपोर्ट को 'लोकतंत्र की समझ : दुनिया में लोग लोकतंत्र का आकलन कैसे करते हैं' नाम दिया गया है। रिपोर्ट इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमाक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (इंटरनेशनल आइडिया) ने जारी की है।
 

सर्वे में अधिकांश देशों के मतदाता अपनी सरकारों से असंतुष्ट थे, लेकिन भारत और तंजानिया के लोगों को अपने संस्थानों पर भरोसा है और वे अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं। 17 देशों में आधे से कम लोग अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं जबकि भारत और तंजानिया में क्रमश: 59 और 79 फीसदी लोग अपनी सरकारों से संतुष्ट हैं। यह सर्वे भारत में कराए गए अन्य सर्वेक्षणों के ही अनुरूप हैं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घरेलू रेटिंग 66 फीसदी या अधिक बनी हुई है। खास बात यह है कि करीब आधे (9) देशों में अल्पसंख्यक समूह अपनी सरकारों से बेहद असंतुष्ट हैं। अमेरिका में अल्पसंख्यकों व सरकार से संतुष्ट समूहों के बीच का अंतर 12% है। 
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आठ देशों के मतदाता मजबूत नेता के पक्षधर
रिपोर्ट के अनुसार, 8 देशों मतदाता देश में मजबूत नेता चाहते हैं। ऐसा एक भी देश नहीं रहा जहां प्रतिक्रिया देने वालों का बहुमत गैर लोकतांत्रित नेतृत्व का पक्षधर हो। ऐसे देश जहां जनप्रतिनिधियों की संख्या अधिक है वहां मजबूत नेता के पक्षधर लोगों की संख्या कम रही।
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