सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें उसने उन सभी विचाराधीन कैदियों को 2-13 नवंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से सरेंडर करने को कहा था जिनकी जमानत अवधि कोविड-19 लॉकडाउन के चलते बढ़ाई गई थी। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट नेशनल फोरम फार प्रिजन रिफार्म्स (एनएफपीआर) द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि कोविड-19 लॉकडाउन के चलते सभी अंतरिम रोक और मंजूर जमानत को बढ़ाने वाला उसका व्यापक आदेश 31 अक्तूबर के बाद प्रभावी नहीं रहेगा। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि हाईकोर्ट का फैसला 23 मार्च 2020 को जारी उसके ही आदेश की भावना के पूरी तरह खिलाफ है।