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US Deportation: दक्षिण सूडान जाएंगे तीसरे देश के आप्रवासी; सुप्रीम कोर्ट ने पलटा मैसाचुसेट्स के जज का आदेश

Fri, 04 Jul 2025 07:30 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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सांकेतिक तस्वीर।
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अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण सूडान से कोई संबंध न रखने वाले कई आप्रवासियों को वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने मई में दिए गए मैसाचुसेट्स के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ब्रायन ई मर्फी का आदेश पलट दिया है, जिन्होंने म्यांमार, वियतनाम और कुछ अन्य देशों से आए करीब 12 लोगों दक्षिण सूडान भेजे जाने पर रोक लगा दी थी और उन्हें हिरासत में ही रखने का आदेश दिया था। 

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सुप्रीम कोर्ट का नया निर्णय न्यायाधीशों द्वारा यह पाए जाने के बाद आया है कि आव्रजन अधिकारी लोगों को तीसरे देशों में तुरंत निर्वासित कर सकते हैं। अदालत के आदेश के बाद अब कुछ सप्ताह पहले रोके गए दक्षिण सूडान भेजे जाने वाले आप्रवासियों को वापस वहां भेजा जाएगा। इन अप्रवासियों ने अपने देश से बाहर के देशों में किसी भी निष्कासन को चुनौती दी थी। चूंकि दक्षिण सूडान लंबे समय से युद्धग्रस्त है ऐसे में आप्रवासियों ने तर्क दिया था कि वे वहां खतरे में हो सकते हैं।

आप्रवासियों के वकीलों ने दिया था ये तर्क
दक्षिण सूडान भेजे जाने वाले आठ प्रवासियों के वकीलों ने अपनी दलील दी थी कि अगर उन्हें दक्षिण सूडान भेजा गया तो उन्हें कारावास, यातना और यहां तक कि मौत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि वहां बढ़ते राजनीतिक तनाव के कारण एक और गृहयुद्ध का खतरा पैदा हो गया है। बता दें कि मई में दक्षिण सूडान भेजे गए आठ लोगों को अमेरिका में गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।
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 साउथ सूडान को लेकर चिंता
बता दें कि साउथ सूडान 2011 में बना नया देश है, लेकिन तब से लगातार गृहयुद्ध, हिंसा और मानवाधिकार हनन का शिकार रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी थी कि वहां फिर से पूर्ण युद्ध की स्थिति बन रही है। मामले में अमेरिका के विदेश मंत्रालय की 2024 की रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां मनमानी हत्याएं, लापता करना, यौन हिंसा और सुरक्षा बलों द्वारा अमानवीय व्यवहार आम हैं। 

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अमेरिका पहले से दे रहा है संरक्षण
गौरतलब है कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने पहले से ही साउथ सूडान से आए कुछ लोगों को टेंपरेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) दे रखा है, जिससे उन्हें वापस नहीं भेजा जा सकता। हाल ही में इस सुरक्षा को नवंबर तक बढ़ा दिया गया है ताकि स्थिति की और समीक्षा की जा सके।  

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