'हम केवल संविधान को लागू करने का रास्ता तलाश रहे'
हालांकि, बंदियाल ने कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। सुनवाई शुरू होने के महज एक घंटे बाद ही स्थगित कर दी गई। उन्होंने कहा, हम किसी पर दबाव नहीं डाल रहे हैं। हम केवल संविधान को लागू करने का रास्ता तलाश रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने विपक्ष के साथ बातचीत को लेकर सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, सरकार ने अपनी सही भावना को दिखाने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
'ऐसा लगता है पास-पास खेल रही सरकार'
देश के एक प्रमुख समाचार पत्र ने न्यायमूर्ति बंदियाल के हवाले से कहा, ऐसा लगता है कि सरकार पास-पास खेल रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने राजनीतिक दलों से 26 अप्रैल को बातचीत करने और हितधारकों को समझौते पर पहुंचने का मौका देने के बाद 27 अप्रैल तक जवाब देने के लिए कहा था। हालांकि, कोई बातचीत नहीं हुई और सरकार ने भी 4 अप्रैल के निर्देश का पालन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार बातचीत को लेकर गंभीर होती तो वह खुद प्रयास करती। अदालत सरकार को बातचीत के लिए बाध्य नहीं कर सकती।
'अगर मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल नहीं किया गया तो..'
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि राजनेताओं को खुद समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए, अगर मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल नहीं किया गया तो 'संविधान और चुनाव पर हमारा आदेश मौजूद' है। शीर्ष न्यायाधीश ने यह भी उम्मीद जताई कि अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और सरकार के बीच गुरुवार को बातचीत होगी।
पीटीआई ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में भंग कर दी थी विधानसभा
पंजाब प्रांत में चुनाव कराने को लेकर सरकार और पीटीआई के बीच गतिरोध चल रहा है। इसी बीच अदालत ने गुरुवार को सुनवाई की। पीटीआई ने 14 और 18 जनवरी को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा विधानसभाओं को भंग कर दिया था, ताकि सत्तारूढ़ पीडीएम गठबंधन को देश में जल्द आम चुनाव कराने के लिए मजबूर किया जा सके।