सुनीता विलियम्स एक और इतिहास बनाने के लिए तैयार हैं। वह अपने सहयोगी बुच विल्मोर के साथ कई महीनों से अंतरिक्ष में फंसी हुई हैं। ऐसे में उन्होंने आगामी पांच नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अपना योगदान देने की इच्छा जाहिर की है। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से ही मतदान देकर एक इतिहास रचेंगी।
1997 से वोट डाला जा रहा
विलियम्स वर्तमान में आईएसएस के कमांडर के रूप में फिलहाल काम कर रही हैं। वह धरती की सतह से करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगी। अंतरिक्ष सेंटर से वोटिंग कोई नई बात नहीं है। नासा के एस्ट्रोनॉट्स 1997 से अपने देश का नेता चुनने के लिए मतदान करते आ रहे हैं। तब टेक्सास विधानमंडल ने नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा से मतपत्र डालने की अनुमति देने वाला एक विधेयक पारित किया था।
अब नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता भी अंतरिक्ष-आधारित मतदाताओं के एक चुनिंदा समूह में शामिल होंगी। बता दें, सबसे पहले डेविड वुल्फ ने मीर स्पेस स्टेशन पर रहते हुए वोट दिया था। उसके बाद हाल ही में 2020 के चुनावों के दौरान केट रूबिन्स ने आईएसएस से मतदान किया था।
ऐसे डालेंगी अपना वोट
अपना वोट डालने के लिए, विलियम्स एक ऐसी प्रक्रिया का पालन करेंगी जिसका उपयोग अन्य अमेरिकी नागरिकों द्वारा विदेशों से मतदान करने के लिए किया जाता है। ऑर्बिटिंग लैबोरेट्री से स्पेस सेंटर में बैठे अंतरिक्ष यात्री इलेक्ट्रॉनिक बैलट की मदद से वोटिंग करते हैं। सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी की मदद से इलेक्ट्रॉनिक मतपत्रों को स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा और फिर अंतरिक्ष यात्री अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे। वोट डालने के बाद इलेक्ट्रॉनिक मतपत्रों को वापस धरती पर भेजा जाता है।
कौन हैं आमने-सामने?
बता दें, इस साल अमेरिका में पाच नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होना है। रिपब्लिकन की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैदान में हैं। जबकि डेमोक्रेट्स की ओर से उप राष्ट्रपति कमला हैरिस चुनावी दौड़ में शामिल हैं।