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Sunita-Butch: नासा 45 दिन सेहत की निगरानी करेगा, अंतरिक्ष से वापसी पर सामने हैं छह बड़ी चुनौतियां; जानिए सबकुछ

Thu, 20 Mar 2025 07:53 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, केप कैनवेरल

सार

अनिश्चितता की दास्तां का आखिरकार अंत हो गया। अंतरिक्ष में फंसी भारतीय मूल की नासा की वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स और अपने सहयोगी बुच विल्मोर ने नौ महीने 14 दिन बाद धरती पर कदम रखा। अब धरती पर आने के साथ ही सुनीता- बुच विल्मोर को कई सारी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा हैं। आईए इसके बारे में सबकुछ विस्तार से जानते है.....

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सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती पर तो लौट आए, पर उनकी घर वापसी अभी आसान नहीं होगी। दोनों को धरती पर चलना और संभलना फिर से सीखना होगा। गुरुत्वाकर्षण के अनुरूप शरीर को ढालना होगा। इसके लिए दोनों को 45 दिन तक नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में रखा जाएगा। उनकी सेहत में बदलावों पर नजर रखी जाएगी। पृथ्वी की आबोहवा में होने वाले परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के बाद ही वे घर वापस जा सकेंगे।
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अंतरिक्ष से जारी तस्वीरों व वीडियो में अंतरिक्ष यात्रियों को हवा में तैरते देखना नीचे से जितना रोचक लगता है, वास्तव में वहां से लौटने पर इसकी अलग चुनौतियां होती हैं। लंबे समय तक माइक्रो ग्रेविटी में रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों व मासपेशियों पर इसका असर होता है। इसे मसल एट्रोफी और बैलेंस इश्यू कहते हैं। इन्हें देखने, चलने, मुड़ने, किसी बात का जवाब देने में वक्त लगता है। इस दौरान हल्की सी लापरवाही दूरगामी असर डाल सकती है और गंभीर बीमारियों जैसे चल नहीं पाने, मानसिक दुविधाएं का डर रहता है।  ऐसे में सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं से निपटना होगा। आईए उसके बारे में जानते है।

स्पेस एनीमिया
स्पेस एनीमिया ऐसी स्थिति है, जो अंतरिक्ष यात्रियों में विस्तारित अंतरिक्ष मिशन के दौरान देखी जाती है। दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के प्रमुख सलाहकार डॉ नरेंद्र सिंघला के मुताबिक, पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण पूरे शरीर में रक्त और तरल पदार्थों के वितरण को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन, अंतरिक्ष में, यह गुरुत्वाकर्षण खिंचाव नहीं होता और शरीर के तरल पदार्थ सिर की ओर ऊपर की ओर बढ़ते हैं। यह बदलाव रक्त की मात्रा और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करता है।

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बेबी फीट
अंतरिक्ष यात्रियों को बेबी फीट की भी समस्या होती है। इसें उनके तलवे की मोटी चमड़ी हट जाती है और वहां बच्चे के समान कोमल त्वजा आ जाती है। इसके कारण अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद चलने में मुश्किल होती है। इससे उबरने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को धीरे-धीरे पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें बनावट वाली सतहों पर नंगे पैर चलना, असुविधा से राहत के लिए पैरों की मालिश करवाना और पैरों की मांसपेशियों और त्वचा को मजबूत करने के लिए व्यायाम करना होता है।

भारहीनता का अनुभव, बोलने में भी दिक्कत का करना पड़ता है सामना
नासा के मुताबिक अंतरिक्ष में भारहीनता का अनुभव होता है। इससे जुबान व होठों पर असर होता है। पृथ्वी पर लौटने के बाद कुछ दिन तक ठीक तरह से बोलने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर अक्सर हड्डियों के घनत्व में अपूरणीय कमी देखी जाती है। अंतरिक्ष में बिताए हर महीने के साथ, अगर उचित सावधानी न बरती जाए तो अंतरिक्ष यात्रियों की वजन सहन करने वाली हड्डियां लगभग एक प्रतिशत कम घनी हो जाती हैं।

ब्रह्मांडीय विकिरण और डीएनए क्षति
अंतरिक्ष ब्रह्मांडीय किरणों, हमारे सौर मंडल के बाहर से उच्च ऊर्जा वाले कणों और सौर विकिरण से भरा हुआ है, जो शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और सेलुलर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पृथ्वी के विपरीत, जहां वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री इन हानिकारक कणों के संपर्क में कहीं अधिक होते हैं। इन किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से उत्परिवर्तन हो सकता है, जिससे कैंसर और अन्य आनुवंशिक विकारों का खतरा बढ़ जाता है। नौ महीनों में सुनीता विलियम्स को लगभग 270 एक्स-रे के बराबर विकिरण स्तर का सामना करना पड़ा होगा।

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अंतरिक्ष में थोड़ा बढ़ जाता है कद, धरती पर लौटते ही दुखती है पीठ 
अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में अपनी रीढ़ की हड्डी के बढ़ने के कारण कुछ इंच लंबे हो जाते हैं। हालांकि, पृथ्वी पर वापस आने के बाद यह अस्थायी ऊंचाई वृद्धि गायब हो जाती है, लेकिन अक्सर रीढ़ की हड्डी के समायोजन के दौरान पीठ में दर्द की शिकायत होती है।

दिल को भी करना होगा दुरुस्त
अंतरिक्ष में दिल का काम धरती की अपेक्षा कुछ कम हो जाता है। वहां गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध रक्त पंप करने के लिए पृथ्वी की तरह कड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ती। इसके कारण हृदय में संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि अंतरिक्ष यात्रियों के हृदय विस्तारित अंतरिक्ष मिशनों के दौरान लगभग 9.4% अधिक गोलाकार हो जाते हैं। हालांकि यह आकार परिवर्तन तत्काल स्वास्थ्य जोखिम पैदा नहीं करता है, लेकिन यह हृदय की पंपिंग दक्षता को कम कर सकता है, जिससे पृथ्वी पर लौटने पर हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में धरती पर लौटते ही दिल को दुरुस्त करने की चुनौती होती है।

क्या है अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पृथ्वी से 254 मील यानी 409 किमी ऊपर स्थित छह शयन कक्षों और दो बाथरूम वाला एक घर है। वास्तव में यह एक अनोखी प्रयोगशाला है। इसमें एक खिड़की भी हैं, जहां से अंतरिक्ष का 360 डिग्री का नजारा लिया जा सकता है। इसके अंदर एक जिम भी है। इसे पांच अंतरिक्ष एजेंसियों, नासा, रॉसकोमोस, ईएसए, सीएसए और जाक्सा ने मिलकर बनाया है। आईएसएस 108 मीटर लंबा है और इस पर एक साथ आठ अंतरिक्ष यान रुक सकते हैं। धरती से स्पेस स्टेशन पर पहुंचने के लिए चार घंटे लगते हैं। धरती से इसे 50 कंप्यूटरों से संचालित किया जाता है। 24 घंटे में आईएसएस धरती के 16 चक्कर लगाता है। इसीलिए यहां एक ही दिन में 16 बार सूर्योदय-सूर्यास्त होता है।

खाने में पिज्जा, सूखा दूध और रोस्ट चिकन
सुनीता ने नौ महीने अंतरिक्ष में बिताने के दौरान 900 घंटे शोध किया। इस दौरान उन्होंने पिज्जा सहित कई तरह के रेडी टू ईट यानी पहले से तैयार व्यंजनों का स्वाद लिया। सुनीता और उनके साथियों ने सूखा दूध, पिज्जा, रोस्ट चिकन, टूना, श्रीम कॉकटेल जैसी चीजों का सेवन किया। नासा ने उनकी कैलोरी मैनेज करने का पूरा इंतजाम किया था। 9 सितंबर, 2024 को नासा ने एक तस्वीर जारी की थी, जिसमें सुनीता और उनके साथी को स्पेस स्टेशन में भोजन करते देखा गया। मिशन पर सुनीता विलियम्स और उनके साथियों का वजन भी घट रहा था, लेकिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इन सभी का वजन खाने की कमी से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के वातावरण की वजह से घटा रहा था।
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1998 में नासा में चुनी गईं
नासा ने सुनीता को 1998 में अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना। जॉनसन स्पेस सेंटर में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने आईएसएस में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मास्को में भी काम किया। उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा 9 दिसंबर, 2006 को स्पेस शटल डिस्कवरी के साथ रही। वह 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहीं। 17 जुलाई 2012 को रूसी अंतरिक्ष यान सोयुज पर सवार होकर चार महीने के लिए फिर अंतरिक्ष स्टेशन गईं।

अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति
सुनीता 16 अप्रैल 2007 को अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति बनीं। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर ट्रेडमिल पर बोस्टन मैराथन को 4 घंटे और 24 मिनट में पूरा किया। 2012 में अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के दौरान वह आईएसएस का नेतृत्व करने वाली दूसरी महिला बनीं। उन्होंने स्टेशन के संचालन की देखरेख की, कक्षा में ट्रायथलॉन पूरा किया और अंतरिक्ष में चहलकदमी करते हुए सूर्य को ‘स्पर्श’ करती हुई एक छवि खींची जो अब एक प्रतिष्ठित छवि बन गई है।

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