जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की यहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ हुई मुलाकात नाकाम रही। दोनों नेताओं ने इस नाकामी पर परदा डालने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल किया कि ‘अच्छे दोस्तों के बीच भी मतभेद हो सकते हैं।’ लेकिन मुलाकात के बाद कई विश्लेषणों में कहा गया है कि तात्कालिक महत्व के जिन दो सबसे बड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच सहमति उभरने की अपेक्षा की गई थी, उन पर बात कहीं आगे नहीं बढ़ी। इस शिखर वार्ता से इसलिए भी अधिक उम्मीद जोड़ी गई थी, क्योंकि चांसलर के तौर पर मर्केल की ये आखिरी अमेरिका यात्रा थी। गौरतलब है कि सितंबर में जर्मनी में होने वाले चुनाव के बाद मर्केल नए चांसलर को सत्ता सौंप देंगी।
कुछ अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक उम्मीद जोड़ी गई थी कि इस बैठक में बाइडन जर्मन चांसलर को कोरोना वैक्सीनों पर से पेटेंट हटाने के लिए राजी कर लेंगे। इन वैक्सीनों को आसानी से दुनियाभर के लोगों को उपलब्ध कराने के मकसद से बाइडन प्रशासन पेटेंट अस्थायी रूप से हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। लेकिन उसका कई यूरोपीय देशों ने विरोध किया है। विरोध करने वालों में जर्मनी भी है। बाइडन-मर्केल शिखर वपार्ता के बाद थिंक टैंक पब्लिक सिटिजेन्स ट्रेड वॉच ने एक बयान में कहा- ‘पेटेंट हटाने पर मर्केल को राजी करने में बाइडन की विफलता से कोरोना महामारी को खत्म करने के प्रयासों को जोरदार झटका लगा है।’