भारत-पाक में साझा उच्चतम औसत तापमान 1990 के बाद से 2010 की भीषण गर्मी के ज्यादातर रिकॉर्ड अप्रैल-मई में टूटने के कगार पर 2010 में सर्वाधिक दर्ज किया गया।
जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी का जो दौर पहले 300 साल में एक बार आता था, अब हर तीन साल में आएगा। ब्रिटेन के मौसम कार्यालय ने एक अध्ययन के आधार पर दावा किया कि उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी की आशंका 100 गुना बढ़ गई है।
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इसके साथ ही अनुमान जताया है कि आने कुछ सप्ताह में दोनों देशों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। भारत-पाक में साझा उच्चतम औसत तापमान 1990 के बाद से 2010 की भीषण गर्मी के ज्यादातर रिकॉर्ड अप्रैल-मई में टूटने के कगार पर 2010 में सर्वाधिक दर्ज किया गया। तब औसत तापमान से अधिक गर्मी की आशंका 312 साल में एक बार होती थी। अब यह आशंका 3.1 साल में एक बार बढ़ गई है।
प्रो. पीटर स्टॉट ने कहा, जब अप्रैल व मई के सभी दिनों का तापमान साथ रखकर देखा जाएगा , तो पता चलेगा कि इस बार उच्चतम तापमान के 2010 के ज्यादातर रिकॉर्ड टूट चुके हैं।