स्वेज नहर में फंसा एवरग्रीन नामक जहाज 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है। अगर इसको सीधा खड़ा कर दिया जाए, तो इसकी ऊंचाई एफिल टॉवर और एंपायर एस्टेट बिल्डिंग से भी ज्यादा होगी। शिप की मालिक जापान की सोई किसेन नामक कंपनी है, लेकिन इसे ताईवान के एवरग्रीन ग्रुप ने लीज पर लिया हुआ और वह ही इसे ऑपरेट कर रहा है। यह शिप चीन से नीदरलैंड्स के रोटरडम पोर्ट जा रहा था। बताया जा रहा है कि तेज हवा की वजह से एवरग्रीन नहर में फंस गया है।
समुद्र में लगा लंबा जाम, सप्लाई चेन पर पड़ रहा असर
इस शिप के फंसने से लाल सागर और भूमध्य सागर के किनारों पर बड़ी संख्या में जहाजों का जाम लगा हुआ है। इसी नहर के रास्ते हर दिन हजारों की संख्या में छोटे बड़े शिप यूरोप से एशिया और एशिया से यूरोप का सफर करते हैं। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो समुद्री जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाते हुए यूरोप तक जाना पड़ेगा। इस रास्ते में कम से कम दो हफ्ते का समय लगता है। समय के साथ-साथ इसमें खर्च भी अधिक आएगा। इसके साथ ही दुनिया भर की सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ेगा।
जहाज के नहर में फंसने के चलते हर घंटे करीब 40 करोड़ डॉलर (लगभग 2800 करोड़ रुपये) की चपत लग रही है। बता दें कि दुनिया में जितना व्यापार होता है, उसका 12 प्रतिशत इसी नहर के जरिये किया जाता है। वर्ष 1869 में बनी यह नहर 193 किलोमीटर लंबी है और कुछ जगहों पर सिर्फ 205 मीटर तक चौड़ी है। ऐसे में इस विशालकाय शिप के फंसने के बाद बाकी जहाजों का आवागमन लगभग नामुमकिन हो गया है।