Sudan Crisis: सूडान के कोरडोफान और दारफुर क्षेत्रों में जारी भीषण हिंसा ने मानवीय संकट की स्थिति को बदतर कर दिया है। इन क्षेत्रों में संघर्ष में सैकड़ों नागरिक मारे जा चुके हैं। राहत संगठनों को जरूरी मदद पहुंचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सड़कें बंद हैं और इलाके युद्ध क्षेत्र बन चुके हैं। अप्रैल 2023 में सेना और अर्धसैनिक बल आरएसएफ के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई थी, जिसमें अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
सूडान के कोरडोफान क्षेत्र में हिंसक संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और दारफुर में हिंसा जारी है, जिससे देश के मानवीय संकट को बदतर बना दिया। राहत कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि उनके लिए लोगों तक मदद पहुंचाना अब बेहद मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 12 जुलाई के सप्ताहांत पर उत्तर कोरडोफान प्रांत के बारा कस्बे के आसपास के गांवों पर हुए हमलों में 450 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 35 बच्चे शामिल थे।
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सूडान में मर्सी कॉर्प्स के कंट्री डायरेक्टर कादरी फुरानी ने एक बयान में कहा, हर दिन कोरडोफान में लोगों की तकलीफें बढ़ती जा रही हैं। लोग ऐसी जगहों पर फंसे हैं, जहां सामने से लड़ाई हो रही है। लोग न ही भाग सकते हैं और न ही उन्हें जरूरी मदद मिल पा रही है। केवल बारा में ही बीते एक हफ्ते में 60 लोगों की मौत हुई है।
सूडान में अप्रैल 2023 से तब युद्ध शुरू हुआ था, जब सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्से (आरएसएफ) के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव खुलकर संघर्ष में बदल गया। इस हिंसा में अब तक 40 हजार से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं और यह दुनिया का सबसे खराब विस्थापन और भुखमरी संकटों में से एक बन गया है। हाल के महीनों में ज्यादातर संघर्ष दारफुर और कोरडोफान क्षेत्रों में हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने गुरुवार को पुष्टि की कि आरएसएफ ने 10 जुलाई से अब तक बारा शहर में 60 नागरिकों की हत्या की है, जबकि कुछ नागरिक संगठनों का दावा है कि यह संख्या 300 तक हो सकती है। गुरुवार को बारा में सेना की ओर से बमबारी में 11 लोगों की मौत हुई। सभी एक ही परिवार से थे। वहीं, 10 से 14 जुलाई के बीच सेना ने पश्चिम कोरडोफान क्षेत्र के दो गांवों पर हमला कर 23 लोगों को मार डाला और दो दर्जन से ज्यादा को घायल कर दिया। संगठन की संचार प्रबंधक ग्रेस वाइरीमा नदुंगु ने बताया कि मर्सी कॉर्प्स के एक राहतकर्मी के भाई की 13 जुलाई को उत्तरी कोरडोफान के उम सैमिमा गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
कादरी फुरानी ने कहा कि कोरडोफान के पश्चिमी और पूर्वी इलाकों के बीच आना-जाना लगभग नामुमकिन हो गया है। बढ़ते संघर्ष के कारण मर्सी कॉर्प्स को चार में से तीन इलाकों में अपने काम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है और काडुगली (दक्षिण कोरडोफान की राजधानी) से आगे पहुंचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और स्थायी मानवीय गलियारे की जरूरत है।
नॉर्वे के शरणार्थी परिषद (एनआरसी) की राहतकर्मी मैथिल्ड वू ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उत्तर औ पश्चिम कोरडोफान में संघर्ष और बढ़ गया है। उन्होंने कहा, बहुत से गांवों को तबाह किया गया है, जला दिया गया है, लोग अपना घर छोड़कर भाग रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वहां की जानकारी बहुत ही कम मिल रही है और बहुत कम संगठन मदद कर पा रहे हैं। यह एक पूरी तरह से युद्ध का मैदान बन चुका है।