सूडान जैसे गरीब देशों में लोग जहां भूखमरी के शिकार हो रहे हैं वहीं इस देश में अत्याचार के मामले भी काफी बढ़ रहे हैं। एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा हुआ है कि सूडान के इस्लामिक स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों से हैवानियत के साथ-साथ अत्याचार की हर सीमा को पार कर दी गई है।
दरअसल इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां के इस्लामिक स्कूल में हजारों बच्चों को जंजीर में बांधकर रखा जाता है फिर उसे पीटा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष से कम आयु के लड़कों को स्कूलों के प्रभारी धार्मिक शिक्षक रोज बुरी तरह से पीटते हैं और मानसिक प्रताड़ना देते हैं। वहीं देश में लगभग 30,000 ऐसे मामले सामने आए हैं।
बीबीसी न्यूज अरबी की पड़ताल के दौरान स्कूल में कुपोषित लड़कों को विद्रोहियों की तरह रखा गया था और वे सभी भीषण गर्मी में फर्श पर सोने के लिए मजबूर थे। यहां किसी भी तरह की चिकित्सीय व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
अंडरकवर रिपोर्टर और पूर्व खलवा छात्र फतेह अल-रहमान अल-हमदानी ने 18 महीने की अवधि में 23 खलवाओं के अंदर वहां की स्थिति जानने के लिए गुप्त रूप से फिल्में बनाई। यह फिल्म दो लड़के मोहम्मद नादेर और इस्माइल की दुर्दशा पर केंद्रित है,जिन्हें पीट-पीटकर मरने की कगार पर ला दिया गया था।
इन लड़कों को पांच दिनों तक बिना भोजन और पानी के खलवा के अंदर कैद और प्रताड़ित किया गया था। उनके घावों पर मरहम लगाया गया था। मोहम्मद नादेर ने जो कहा वह रोंगटे खड़े करने वाले थे। नादेर ने कहा कि यहां जंजीर में बांधकर बड़े छात्रों द्वारा छोटे छात्रों से दुष्कर्म किया जाता है। जांच के दौरान अन्य खलवाओं में दुष्कर्म और यौन दुर्व्यवहार की खबरें सही पाई गई।
नादेर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों के परिवार के आने से पहले उनसे दुष्कर्म किया जाता है जो कि बेहद दर्दनाक होता है। नादेर ने कहा कि इनमें से तो कुछ बच्चे 5 वर्ष से भी छोटे रहते हैं।