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अध्ययन: खुद को कमजोर मानने वाले दूसरे का चेहरा पढ़ने में ज्यादा माहिर; कैसे लोग संवेदनशील, सामाजिक दूरी क्यों?

Tue, 22 Sep 2026 08:10 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, लंदन।

सार

अध्ययन में इंसानी बर्ताव को लेकर रोचक जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक खुद को कमजोर मानने वाले लोग दूसरों का चेहरा पढ़ने में ज्यादा माहिर होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकन के शोध में खुलासा हुआ है कि नकारे जाने की आशंका से घिरे लोग ज्यादा संवेदनशील हैं।
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इंसानों के बर्ताव पर ब्रिटेन में शोध - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-ग्राफिक्स
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विस्तार
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जब कोई आपसे बात करते समय यह बोले कि वो बहुत बहादुर है, किसी से नहीं डरता या फलां काम तो बाएं हाथ का खेल है तो कई बार इस पर खीज उठना स्वाभाविक है। लेकिन आपने शायद ही कभी ऐसा महसूस किया होगा कि आपके चेहरे पर नाराजगी का भाव उभरने से पहले ही ऐसी डींगें भरने वाले चुप हो जाते हैं।

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दरअसल, एक नए अध्ययन में पता चला है कि खुद को अंदर से कमजोर मानने वाले और लोगों के सामने बहादुरी का दावा करने वाले ज्यादा संवेदनशील होते हैं। सामने वाले के चेहरे पर गुस्से या घृणा का भाव वो तुरंत भांप जाते हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकन की तरफ से हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के मन में अपने आत्म-सम्मान को लेकर अचेतन रूप से संदेह होता है, वो इस बात को बहुत जल्द समझ जाते हैं कि सामने वाले को उसकी बात अच्छी लग रही है या नहीं।  विज्ञान पत्रिका पर्सनैलिटी एंड इंडिविजुअल डिफरेंसेस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सामाजिक रूप से नकारे जाने के प्रति संवेदनशीलता व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और दूसरों के साथ उसके सामाजिक संबंधों को भी गहराई से प्रभावित करती है।

अस्वीकृति के डर से बढ़ा लेते हैं सामाजिक दूरी
डॉ. कोर्जेनियोव्स्का ने बताया, जब किसी व्यक्ति का अचेतन आत्म-सम्मान कम होता है, तो उसका दिमाग संभावित सामाजिक अस्वीकृति से बचने के लिए लगातार अलर्ट मोड पर रहता है। शोध में सामने आया कि चेहरे पर घृणा के भावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील लोग नकारे जाने के डर से एक सामाजिक दूरी बना लेते हैं।
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क्या है चेतन व अचेतन आत्म-सम्मान?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, आत्म-सम्मान केवल वह नहीं है जो हम ऊपर से महसूस करते हैं या दूसरों को बताते हैं। मनोविज्ञान इसे दो मुख्य हिस्सों में बांटता है।

  • स्पष्ट या चेतन आत्म-सम्मान वह भावना है जिसके बारे में हम सचेत होते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति खुद को योग्य या प्रतिभाशाली मानता  है और इसे शब्दों में बयां कर सकता है।
  • अन्तर्निहित या अचेतन आत्म-सम्मान मन के भीतर की वो भावना है जिसमें व्यक्ति कई बार खुद को बेहद आत्मविश्वासी दिखाता है लेकिन अचेतन मन में खुद को लेकर गहरे संदेहों से घिरा होता है।

भाव पहचानने की क्षमता के आधार पर आंका
मुख्य शोधकर्ता डॉ. पैट्रीसिजा कोर्जेनियोव्स्का और उनकी टीम ने प्रयोग के दौरान प्रतिभागियों को ऐसे छोटे वीडियो दिखाए गए जिनमें कंप्यूटर के जरिये किसी व्यक्ति का सपाट चेहरा धीरे-धीरे गुस्सा, घृणा, डर या खुशी जैसी भावनाओं में बदलता था।

  • चेहरों पर भावों की तीव्रता 2-2 प्रतिशत के बारीक अंतर से बढ़ रही थी। प्रतिभागियों को निर्देश दिया गया था कि चेहरे पर जैसे ही कोई भावना उभरती हुई दिखे, तुरंत बटन दबाएं। 
  • नतीजों में देखा गया कि जिन लोगों का अचेतन आत्म-सम्मान कम था, उन्होंने गुस्से व घृणा के भावों को बेहद शुरुआती और हल्के स्तर पर ही पहचान लिया।
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