कोरोना मरीजों में स्ट्रोक का खतरा अन्य मरीजों की तुलना में अधिक है। कोरोना के दुष्प्रभावों को लेकर जारी अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्ट्रोक कांफ्रेंस-2021 में विशेषज्ञों ने कहा, अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों का चिकित्सा इतिहास, भौगोलिक परिवेश का सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया। इसमें अमेरिका में जनवरी से नवंबर के बीच अस्पताल में भर्ती हुए 20,000 से अधिक मरीजों के आंकड़े जुटाए गए।
विशेषज्ञ एस शाकिल के मुताबिक, आंकड़ों के अध्ययन से यह पता चला कि कोरोना स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है। उनके अनुसार महामारी के इस दौर में यह भी पता चला कि यह केवल श्वसन से जुड़ी बीमारी नहीं है बल्कि वास्कुलर बीमारी भी है, जो कई अंगों को प्रभावित करती है।
60 से ऊपर के पुरुषों को ज्यादा खतरा
अस्पताल में भर्ती 20,000 कोरोना मरीजों में 281 (1.4 फीसदी) मरीजों में स्ट्रोक की पुष्टि हुई। जिनमें 148 मरीज (52.7) फीसदी में इस्मीक स्ट्रोक की पुष्टि की गई। 7 मरीजों में टीआईए और 127 में ब्लीडिंग स्ट्रोक पाया गया।
अध्ययन में पाया गया कि स्ट्रोक के अधिकांश मामले करीब 64 फीसदी पुरुषों से जुड़े थे और उनकी औसत आयु 65 वर्ष के करीब थी। इसके साथ ही इस्मीक अटैक वाले 41 फीसदी मरीज टाइप टू डायबिटिज से जूझ रहे थे। इनमें 80 फीसदी मरीजों को उच्च रक्तचाप की शिकायत थी।