वैश्विक महामारी कोरोना के मामलों में दुनियाभर में आई कमी प्रोत्साहित करने वाली है, लेकिन खतरा अभी कम नहीं हुआ है। कई देशों में टीकाकरण की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन फिर भी एहतियात बरतने की जरूरत है। एक नए शोध में पता चला है कि फेस मास्क के अंदर संघनन (कंडेनशेसन) रहने से कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा कम रहता है। इसलिए कहा गया है कि फेस मास्क लगाने से कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।
शोध में पता चला है कि किसी व्यक्ति के मुंह और उसके मास्क के बीच हवा में बढ़ी हुई नमी मास्क पहनने वाले के शरीर को वायुमार्ग से वायरल कणों को हटाने में मदद करती है।
एनआईएच की टीम को पिछले शोध में पता चला था कि जो लोग मास्क पहनते हैं उनमें अक्सर कोवि -19 संक्रमण के कम गंभीर रूप होते हैं। एनआईएच की टीम ने अपने उसी शोध के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
मास्क किस वस्तु से बना है इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि उसे सही तरीके से पहना जाए : अध्ययन
एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कुछ मामलों में कोविड-19 से बचने के लिए पहना जाने वाला मास्क किस चीज से बना है इससे अधिक यह मायने रखता है कि उसे सही ढंग से पहना जाए। ब्रिटेन के कैम्ब्रिज यूनवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान हुए तमाम अध्ययनों में बताया गया है कि मास्क पहनने से कोरोना वायरस के प्रसार में कमी आती है लेकिन उचित तरीके से मास्क पहनने के प्रभाव के बारे में हमारी समझ बहुत सीमित है।
मास्क पहनने को लेकर अध्ययन में पाया गया कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मास्क - जैसे एन-95 को भी अगर ठीक तरीके से नहीं पहना जाए तो वे भी कपड़े के मास्क से बेहतर साबित नहीं होते। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक चेहरे की हल्की बनावट में अंतर -जैसे त्वचा में वसा का जमाव- भी मास्क के सटीक तरीके से पहनने में अंतर पैदा कर देता है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नियमित तौर पर मास्क के सटीक होने की जांच की जाती है, लेकिन इस जांच के असफल होने की दर अधिक है क्योंकि पहनने वाले द्वारा मामूली लीक का पता लगाना असंभव होता है।
वायरस रोधी परत वाला मास्क कोरोना वायरस को नष्ट कर सकता है : अध्ययन
वायरस रोधी परत की प्रौद्योगिकी पर काम कर रहे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक से तैयार मास्क एक घंटे में प्राणघातक कोरोना वायरस को नष्ट कर व्यक्ति को सुरक्षित कर सकते हैं। वायरस रोधी परत चढ़ाने की प्रौद्योगिकी को ‘डियोक्स’ कहा जाता है।
‘द डेली टेलीग्राफ’ में छपी खबर के मुताबिक मास्क पर वायरस रोधी अदृश्य परत वायरस की बाहरी परत पर हमला कर प्रभावी तरीके से कोरोना वायरस के नए स्वरूपों को भी नष्ट कर सकती है जिनमें ब्रिटेन का कथित केंट वायरस प्रकार और दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना वायरस का नया प्रकार भी शामिल है।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में केमिकल इंजीनियरिंग एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग में वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. ग्राहम क्रिस्टी ने अखबार से कहा, ‘मास्क की सतह पर लगाई गई वायरस रोधी परत वायरस की बाहरी झिल्ली पर हमला कर उसे नष्ट कर देती है। बदलाव करने वाले वायरस में अन्य हिस्सों के विपरीत बाहरी झिल्ली एक समान होती है। इसलिए यह वायरस रोधी परत कोरोना वायरस के नए प्रकार पर भी कारगर होगी।’
उन्होंने कहा, ‘यहां तक अगर आप वायरस के पूरे जीनोम में बदलाव कर सकते हैं तो भी उसके खोल पर असर नहीं पड़ेगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि कोरोना वायरस के सभी प्रकार पर यह परत एक समान प्रतिक्रिया करेगी क्योंकि ढांचे के आधार पर सभी लगभग एक समान हैं।’