पाकिस्तान चीनी निवेश बढ़ाने के लिए के लिए हाल में हुए समझौतों का पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जोरदार विरोध शुरू हो गया है। बलूचिस्तान को अलग देश बनाने के लिए संघर्ष कर रहे संगठन- बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने चेतावनी दी है कि वह चीनी ठिकानों पर अपने हमले तेज कर देगा।
चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) चीन के बीआरआई का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। चीन इसमें लगभग 60 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। लेकिन इस परियोजना से जुड़े ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए इन ठिकानों पर पाकिस्तान सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है। बीएलए एक मजबूत संगठन है। पाकिस्तानी मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक अब तक उसके हमलों में 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। बीते दो फरवरी को बलूचिस्तान के पंजगुर और नोशकी जिलों में दो जगहों पर गोलीबारी हुई। बताया जाता है कि बीएलए ने ये हमले इमरान खान की चीन यात्रा के विरोध में किए। खान तीन फरवरी को चीन गए थे।
बीएलए ने पांच फरवरी को जारी एक बयान में दावा किया कि वे दोनों हमले उसके ‘ऑपरेशन गंजल’ के तहत किए गए। बीएलए का दावा है कि इस ऑपरेशन के तहत अब तक वह 16 ठिकानों पर हमले कर चुका है। लेकिन पाकिस्तान की सेना ने बीएलए के इस दावे का खंडन किया है। बल्कि उसका दावा है कि जवाबी कार्रवाइयों में उसने 20 उग्रवादियों को मार गिराया है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में पर्यवेक्षकों के हवाले से कहा गया है कि बीएलए के कुछ उग्रवादी संभवतः सीमा पार कर ईरान चले गए हैं। उन पर्यवेक्षकों ने ईरान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी हुसैन शेख-ओ-सलाम की इस हालिया टिप्पणी को महत्त्वपूर्ण बताया है कि ग्वादार बंदरगाह व्यापार के लिए सुरक्षित नहीं है। शेख-ओ-सलाम ने चीन और पाकिस्तान को सलाह दी कि वे व्यापार मार्ग के रूप में ईरान में मौजूद चाबहर बंदरगाह का इस्तेमाल करेँ।