अजरबैजान के बाकू में सोमवार को शुरू हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन कॉप-29 में पहले ही दिन तीखी नोकझोंक हुई। विकासशील और विकसित देशों के बीच एजेंडे के मुद्दों के चुनाव पर बहस हुई। यूएन जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमत होने का आह्वान किया। इसके बाद विकसित और विकासशील देश कार्बन उत्सर्जन कर के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए।
दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे एकतरफा व्यापार उपाय किए जाएं या नहीं। सीबीएएम भारत और चीन जैसे देशों से आयातित ऊर्जा उत्पाद जैसे लोहा, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक पर यूरोपीय संघ का प्रस्तावित कर है। यह कर इन वस्तुओं के उत्पादन के दौरान पैदा हुए कार्बन उत्सर्जन पर आधारित है। यूरोपीय संघ का कहना है कि उन्हें अपने सीबीएएम पर बात करनी चाहिए। जबकि विकासशील देश कह रहे हैं कि सीबीएएम उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाएगा
भारत और चीन जैसे विकासशील देशों का कहना है कि सीबीएएम उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाएगा। सम्मेलन में भारत और चीन जैसे विकासशील देश चाहते हैं कि जलवायु वित्त पर मुख्य रूप से बात की जाए। वहीं विकसित देशों का कहना है कि सम्मेलन में पिछले सम्मेलन के सभी मुद्दों जैसे कार्बन उत्सर्जन में कमी और जीवाश्म ईंधन से संक्रमण जैसे मुद़्दों पर चर्चा हो।
विकासशील देशों का मानना है कि यह जलवायु वित्त की जरूरत को नजरअंदाज करने की कोशिश है। चीन ने बीते महीने चार विकासशील देशों ब्राजील, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका की तरफ से यूएन जलवायु निकाय को एक प्रस्ताव पेश कर इस वर्ष के कॉप में एकतरफा व्यापार उपायों के मुद्दे पर बात करने का अनुरोध किया था।
साइमन स्टील बोले- जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम करें
जलवायु सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि वैश्विक तौर पर जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करने और कार्बन बाजारों को लेकर कड़ा रुख अपनाने की जरूरत है। साइमन स्टील ने कहा कि प्रगति के बावजूद वैश्विक स्तर पर बढ़ते जलवायु संकट पर बात करने के लिए कॉप एक बेहतर मंच है।
उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 जलवायु कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तंत्र की रूपरेखा तैयार करता है। इससे देशों को कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक साथ काम करने का मौका मिलता है। यह कार्बन बाजारों और गैर-बाजार दृष्टिकोणों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। आगामी जलवायु योजना को लेकर उन्होंने कहा कि कॉप 29 की पहल का उद्देश्य देशों को उनकी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को तैयार करने और उन पर काम करने में सहायता करना है।