रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने कश्मीर के हालात पर चर्चा की और कहा कि घाटी में तनाव कम करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय भूमिका निभा सकता है। साथ ही उत्तरी आयरलैंड शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने वाले ‘गुड फ्राइडे समझौते’ की ही तरह भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता किसी समाधान पर पहुंचने में मदद कर सकता है।
कश्मीर संकट पर आयोजित एक पैनल चर्चा में भारत, पाक और ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के नई दिल्ली के फैसले की पृष्ठभूमि में चर्चा की। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और टेरीजा मे के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे सर मार्क लियाल ग्रांट ने तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के बीच 2001 में वार्ता के दौरान समाधान तलाशने का मौका गंवाए जाने पर दुख जताया।
संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के पूर्व प्रतिनिधि ग्रांट ने कहा, ‘उत्तरी आयरलैंड गुड फ्राइडे समझौते की ही तरह एक शांतिपूर्ण समाधान तलाशा जाना चाहिए। इसके तहत स्थानीय लोगों को कश्मीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाने की आजादी हो।’ भारत की मशहूर टीवी पत्रकार निधि राजदान ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इस्लामाबाद 1948 में कश्मीर को हथियाने में नाकामयाब रहा और उसके बाद से वह क्षेत्र में कई वर्षों से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। सीमा पार आतंकवाद के कारण क्षेत्र में बहुत खून बहा है।’
यूएन में पाकिस्तान की पूर्व प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कहा, ‘कोई भी क्षेत्र में और तनाव बढ़ते नहीं देखना चाहता। हम अधिक बड़े संकट के कगार पर हैं। विश्व समुदाय को दमकल की तरह काम करना बंद करना चाहिए और शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।
पाकिस्तान भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने को तैयार है।’ ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा, ‘अनुच्छेद 370 हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो किया है, वह बहुत बड़ा और निरर्थक कदम है। इसके पीछे कोई रणनीति नजर नहीं आती, लेकिन आईएसआई की भूमिका और आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति कम मजबूत है।’