अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे पूर्ववर्ती जो बाइडन प्रशासन के दौरान ईसाई समुदाय के साथ हुए किसी भी तरह की भेदभाव की घटनाओं की जानकारी दें। जो बाइडन जनवरी 2021 से जनवरी 2025 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे। यह अपील उस समय की गई है, जब ईसाई समुदाय ईस्टर के पहले पवित्र सप्ताह को मना रहा है।
यह अपील ऐसे समय में की गई है, जब अमेरिकी राजनयिक कोर में डर और चिंता का माहौल है। दरअसल, सरकार एलन मस्क के नेतृत्व वाले सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) की सिफारिशों पर आधारित बजट और कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने के लिए नया प्रस्ताव व्हाइट हाउस में पेश करने जा रही है।
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मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, इस रिपोर्ट में विदेश मंत्रालय के ताजा अनुमान शामिल होंगे कि कितने लोग स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होना चाहते हैं या नौकरी छोड़ना चाहते हैं और इससे भविष्य में कर्मचारियों की संभावित छंटनी पर क्या असर पड़ेगा, ताकि डीओजीई और सरकारी मानव संसाधन एजेंसी की ओर से तय किए गए लक्ष्य पूरे किए जा सकें।
इन अधिकारियों ने बताया कि व्हाइट हाउस के निजी प्रबंधन कार्यालय को जो रिपोर्ट दी जाएगी, वह विदेश मंत्रालय के पुनर्गठन पर अंतिम निर्णय नहीं होगी। उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि कर्मचारियों के बीच अफवाह थी कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
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जब विदेश और लोकसेवा के कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर जानकारी का इंतजार कर रहे हैं, तो विदेश मंत्रालय ने एक पहल शुरू की है। इसका मकसद अपनी नीतियों और भर्ती की प्रथाओं में धार्मिक भेदभाव को समाप्त करना है। इसमें खासतौर पर उन गतिविधियों पर फोकस किया गया है जो पूर्व राष्ट्रपति बाइडन के कार्यकाल में ईसाई विरोधी हो सकती हैं।
अमेरिका के सभी दूतावासों को शुक्रवार को पत्र भेजे गए, जिनमें रूबियो ने कर्मचारियों से कहा कि वे जनवरी 2021 से जनवरी 2025 के बीच ईसाइयों या उनके समर्थन में काम करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ की गई किसी भी भेदभावपूर्ण कार्रवाई की रिपोर्ट दें। इसमें कहा गया, टास्क फोर्स उन व्यक्तियों और समूहों से जानकारी और विचार एकत्र करेगी, जिन पर ईसाई विरोधी पूर्वाग्रह या अन्य धार्मिक भेदभावपूर्ण व्यवहार का असर पड़ा है, जिसमें मंत्रालय के कर्मचारी भी शामिल होंगे।
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