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श्रीलंका: आत्मघाती हमलावर का नहीं था कोई आपराधिक रिकॉर्ड, स्थानीय नागरिकों पर शक

Tue, 23 Apr 2019 10:41 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सीरियल बम धमाकों के बाद रोती महिला - फोटो : PTI
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पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रीलंका में रविवार को हुए सिलसिलेवार धमाकों में शामिल एक आत्मघाती हमलावर संपन्न श्रीलंकन व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखता था। इन हमलों में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 310 हो गई है। वहीं सात भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने 40 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

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जिस हमलवार ने खुद को पांच सितारा होटल शंगरी-ला में उड़ाया था वह श्रीलंका के एक संपन्न परिवार से था। श्रीलंका के कैबिनेट मंत्री और प्रवक्ता रजीथा सेनारत्ने ने सोमवार को कहा कि स्थानीय इस्लामिक समूह नोशनल तौहीद जमात (एनटीजे) का हाथ इन आठ बम धमाकों के पीछे हो सकता है।

सेनारत्ने ने कहा कि इस समूह को मिलने वाले बाहरी समूह की भी जांच होगी। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि देश का एक छोटा सा संगठन ऐसा कर सकता है। हम उनके और उनके अन्य लिंक के अतंरराष्ट्रीय सहयोग की जांच कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने बम और आत्मघाती हमलावर तैयार किए।'
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फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन पुलिस द्वारा देशभर में 11 अप्रैल को भेजे गए अलर्ट में कहा गया था कि एनटीजे गिरिजाघरों और भारतीय उच्चायोग को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। सेनारत्ने ने कहा कि श्रीलंका को सुनियोजित हमलों के बारे में विदेशी जांच एजेंसियों से चार अप्रैल को सूचना मिली थी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे और राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना के बीच मतभेद और संचार की कमी की कारण प्रधानमंत्री को खुफिया जानकारी के बारे में नहीं बताया गया। उन्होंने इसपर आंखें बंद कर ली। सेनारत्ने ने स्वीकार किया कि यह हमले श्रीलंका सरकार की विफलता हैं लेकिन इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति को जिम्मेदार ठहराया।

राष्ट्रपति सचिवालय में सलाहकार और समन्वय सचिव श्रीलाल लक्षतिलक ने बताया कि एजेंसियां हमलों के पीछे की वजह जानने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यदि आप अतीत को देखें तो ज्यादातर दक्षिणी एशियाई चरमपंथी समूहों जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआईएस भी शामिल है, उन्होंने कभी श्रीलंका पर हमला नहीं किया।'

उन्होंने कहा, 'भारतीय एजेंसियों को 2008 में हुए मुंबई हमलों और उसके समान आतंकी हमलों के बारे में पहले से पता था। श्रीलंका को सुरक्षित माना जाता था। जांच के शुरुआती चरण में, हमें शक है कि स्थानीय रूप से कट्टरपंथी तत्वों के एक उभरते समूह ने यहां अपनी उपस्थिति स्थापित करने के हमलों को अंजाम दिया है।'
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