राष्ट्रपति की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि संविधान की धारा 34 के तहत दी गई माफी तमिल सांसदों के हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप आई है। तीन कैदी पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा की हत्या के लिए प्रयासके लिए दोषी ठहराए गए थे।
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को आठ तमिल कैदियों को माफी दे दी है। ये सभी कैदी लिट्टे से कथित संबंधों के आरोप में पिछले साल से ज्यादा समय से जेल में बंद थे।
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राष्ट्रपति की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि संविधान की धारा 34 के तहत दी गई माफी तमिल सांसदों के हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप आई है। आठ कैदियों में से तीन पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा की हत्या के लिए प्रयासके लिए दोषी ठहराए गए थे। कुमारतुंगा ने उनको माफी के लिए सहमति दी थी। कुमारतुंगा 1994 और 2005 के बीच देश के राष्ट्रपति रहे।
माफ करने वालों में से दो ने दायर याचिका पर अदालत में इस पर अपनी सहमति व्यक्त की है।
इन आठ कैदियों में से तीन दोषियों ने 22 साल जेल में बिताए। इन्हें तीस साल की सजा सुनाई गई थी। वहीं दो कैदियों ने पांच साल जेल में बिताए, इन्हें 14 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। जबकि एक अन्य कैदी ने 14 साल की सजा सुनाई गई थी, उसने 11 साल जेल में बिताए।
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लिट्टे से कथित संबंध रखने वाले अन्य तमिल कैदियों की रिहाई के लिए तमिल राजनीतिक दल और अधिकार समूह दबाव बना रहे थे। इन कैदियों को आतंकवाद रोकथाम अधिनियम (पीटीए) के तहत लंबे समय तक हिरासत में रखा गया।
पीटीए को निरस्त करने के लिए श्रीलंका पर भारी अतंरराष्ट्रीय दबाव है। 2021 में यूरोपीय संसद ने पीटीए को निरस्त करने के लिए श्रीलंकाई वस्तुओं के निर्यात के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) की पंसदीदा कर रियायतों को निलंबित करने का प्रस्ताव लाई थी।