पिछले साल सितंबर में राष्ट्रपति बनने के बाद दिसानायके शुक्रवार को पहली बार जाफना पहुंचे। अपनी इस यात्रा पर उन्होंने भारतीय मूल के तमिलों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनकी जमीनें लौटा दी जाएंगी।
श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने जाफना के तमिलों को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही उनकी जमीनें लौटा दी जाएंगी, जिसे सेना ने लिट्टे के खिलाफ लड़ाई के दौरान सैन्य उद्देश्यों के लिए अपने कब्जे में ली थी। जाफना तमिल बाहुल्य श्रीलंका के उत्तरी प्रांत की राजधानी है।
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पिछले साल सितंबर में राष्ट्रपति बनने के बाद दिसानायके शुक्रवार को पहली बार जाफना पहुंचे। अपनी इस यात्रा पर उन्होंने भारतीय मूल के तमिलों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनकी जमीनें लौटा दी जाएंगी। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि भूमि को उसके असली मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही दिसानायके ने कहा कि सरकार के पास देश में कहीं भी भूमि को विकास परियोजनाओं या सुरक्षा मकसद से अपने कब्जे में लेने का अधिकार होता है।
80 के दशक में लिट्टे के खिलाफ लड़ाई के दौरान श्रीलंकाई सेना ने तमिल बाहुल्य जाफना के पलाली सैन्य अड्डे के आसपास उच्च सुरक्षा जोन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जमीनों को अपने कब्जे में लेना शुरू किया था। श्रीलंका सरकार ने सैन्य उद्देश्य के लिए जाफना में करीब 3500 एकड़ भूमि अपने कब्जे में ली थी। साल 2015 से सरकार ने तमिलों को उनकी जमीनें लौटाने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में तमिलों को उनकी जमीन नहीं लौटाई गई है। अलग तमिल राष्ट्र की मांग को लेकर लिट्टे की श्रीलंका की सरकार से करीब तीन दशकों तक चली लंबी लड़ाई 2009 में वी प्रभाकरण के खात्मे के साथ समाप्त हो गई थी।