suspected migrants from Sri Lanka rescued off Vietnamese coast
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आर्थिक संकट के कारण समुद्री रास्ते से भागे श्रीलंका के 305 लोगों को अब वियतनाम ले जाया जा रहा है। मंगलवार को खबर आई कि ये श्रीलंकाई मछली मारने की नौका से भागे थे, लेकिन स्प्रैटले द्वीप के पास पहुंच कर रास्ता भूल गए। वहां एक जापानी नौका ने उन्हें बचाया। बाद में जापानी नौका ने उन्हें वियतनाम की एक नौका में बैठा दिया। ये लोग श्रीलंका से संभवतया कनाडा जाने के लिए निकले थे।
वियतनाम के एक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिस समय इन श्रीलंकाइयों को वियतनामी नौका में बैठाया या, उस समय श्रीलंका के अधिकारी भी मौजूद थे। इन लोगों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। दो लोग जख्मी अवस्था में पाए गए। इन श्रीलंकाइयों को आराम से लाने के लिए बाद में वियतनाम एक दूसरी नौका भी भेजी।
श्रीलंका की वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम ने बताया है कि श्रीलंका में महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग देश छोड़ कर गए हैं। इनमें से बहुत से लोग गैर-कानूनी ढंग से समुद्री रास्ते से देश से निकले हैं। अभी भी बाहर जाने की इच्छा रखने वाले लोगों की लंबी कतार है। श्रीलंका में आर्थिक हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। इस वजह से लोगों की हताशा बढ़ रही है और उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो इन हालात से बचने के लिए देश से निकलने की फिराक में हैं।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में बताया है कि श्रीलंका में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिन्हें तुरंत मानवीय मदद की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या अब 34 लाख हो गई है। श्रीलंका में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने मंगलवार को एक साझा बयान जारी कर बताया कि उन्होंने लोगों को भोजन मुहैया कराने के लिए सात करोड़ 90 लाख डॉलर की रकम इकट्ठा की है। लेकिन ये रकम काफी नहीं है। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो खाने के मोहताज हैं। इन एजेंसियों ने कहा है कि ऐसे सभी लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अभी सात करोड़ डॉलर की अतिरिक्त रकम की जरूरत है।
एजेंसियों ने कहा- ‘श्रीलंका में खाद्य असुरक्षा की स्थिति में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। इसकी एक वजह यह है कि लगातार दो सीजन में देश में फसल की कम पैदावार हुई। इसके अलावा विदशी मुद्रा की कमी और आम परिवारों की घटी क्रयशक्ति भी इसकी वजहें हैं।’ इन एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि श्रीलंका की कुल दो करोड़ 20 आबादी के बीच लाखों लोगों की ऐसी हालत हो गई कि उनकी जान बचाने के लिए बाहरी मदद की जरूरत है।
श्रीलंका में आम लोगों का सब्र भी जवाब देता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते एक बार फिर कोलंबो में एक बड़ा सरकारी विरोधी जन प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें ट्रेड यूनियनों ने बढ़-चढ़ कर भागीदारी की। आयोजकों ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विक्रमसिंघे लोगों को थोड़ी भी राहत पहुंचाने में नाकाम रहे हैं।