श्रीलंका संसद के स्पीकर ने सोमवार को कहा कि वह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नए प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वह तब तक उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे जब तक राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं करते। बता दें 26 अक्तूबर को राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने मौजूदा प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के स्थान पर राजपक्षे को नियुक्त किया है। उनके इस फैसले की राजनीतिक पार्टियां और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में काफी आलोचना हो रही है।
संसद के स्पीकर कारु जयासुरिया का कहना है, 'अधिकांश सदस्यों का मानना है कि संसद में हुए बदलाव असंवैधानिक और परंपराओं के खिलाफ हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'इसी के तहत मैं बहुमत की ओर से कह रहा हूं कि उसी स्थिति को स्वीकार करें जो इन बदलावों से पहले थी। जब तक कोई नया ग्रुप बहुमत साबित नहीं करता। इसलिए मुझे बदलाव से पहले की स्थिति को स्वीकार करना होगा।'
इससे पहले खबर आई थी कि राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने संसद निलंबित करने के अपने पूर्व के आदेश को वापस ले लिया है और सोमवार को विधायिका की बैठक बुलाई है। 5 नवंबर से संसद सुचारू रूप से काम करेगी। संसद ने महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री के तौर पर मान्यता भी दे दी है।
सिरीसेना ने चीन हितैषी महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाते हुए रानिल विक्रमसिंघे की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। विक्रमसिंघे को भारत का हितैषी माना जाता है। उन्होंने अपने निलंबन को असंवैधानिक बताते हुए मांग की थी कि उन्हें संसद में अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाए। प्रधानमंत्री कार्यालय में एक बैठक को संबोधित करते हुए राजपक्षे ने कहा, 'राष्ट्रपति ने फैसला लिया है कि 5 नवंबर से संसद काम करेगी।'
बता दें कि राष्ट्रपति सिरीसेना ने बीते शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम में विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाकर उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। सिरीसेना ने 16 नवंबर तक संसद को निलंबित कर दिया था। अपने पत्र में उन्होंने कहा था, 'मैंने आपको संविधान के 42 (1) (अनुच्छेद) के तहत प्रधानमंत्री नियुक्त किया था और आपको नियुक्त करने के प्राधिकार से आपको नोटिस देता हूं कि आपको प्रधानमंत्री के पद से मुक्त किया जाता है।'
संसद निलंबित करने को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मकसद सांसदों को रानिल विक्रमसिंघे के पाले से राजपक्षे के समर्थन में लाने के लिये समय हासिल करना था, ताकि वह 225 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिये 113 का आंकड़ा जुटा सकें। सिरीसेना और संसद के स्पीकर कारू जयसूर्या के बीच बुधवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई। जिसके बाद सिरीसेना ने संकेत दिया था कि वह अगले सप्ताह संसद का सत्र बुला सकते हैं।