कर्ज में डूबे श्रीलंका की मदद के लिए भारत की राह पर चीन भी आगे बढ़ रहा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को इस संबंध में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा चीन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह श्रीलंका के कर्ज पुनर्गठन में सहयोग करेगा। इतना ही नहीं, चीन ने इस बात का भी दावा किया है कि कर्ज में डूबे देश के लिए आईएमएफ से 2.9 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज हासिल करने की सबसे बड़ी बाधा को दूर कर दिया है।
20 मार्च को होगी आईएमएफ बोर्ड की बैठक
वहीं, कर्ज में डूबे श्रीलंका को 2.9 अरब डॉलर के राहत पैकेज की संभावित मंजूरी के लिए आईएमएफ बोर्ड की बैठक 20 मार्च को होने वाली है। मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है कि श्रीलंका को अब सभी प्रमुख द्विपक्षीय लेनदारों से वित्तपोषण का आश्वासन मिला है। जिसके बाद यह विस्तारित फंड सुविधा के तहत वित्तपोषण के लिए 1 सितंबर, 2022 को पहुंचे कर्मचारी स्तर के समझौते की मंजूरी के लिए 20 मार्च को आईएमएफ के बोर्ड द्वारा विचार करने का मार्ग प्रशस्त करता है। गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का बयान संसद में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की टिप्पणी के बाद आया है।
विक्रमसिंघे ने दिया बड़ा बयान
देश के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे जोकि देश के वित्तमंत्री भी हैं, ने संसद में बताया कि बीती रात हमें चीन के एक्जिम बैंक से एक नया पत्र मिला है। मैंने और सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने हमारे आशय पत्र पर हस्ताक्षर करके कल रात ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को भेज दिया है।
आईएमएफ से राहत की उम्मीद
विक्रमसिंघे ने आगे कहा कि आईएमएफ से बेलआउट पैकेज के संबंध में हमने अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी कर दी है। हमें उम्मीद है कि आईएमएफ इस मुद्दे पर महीने के तीसरे या चौथे सप्ताह तक अपना काम पूरा कर देगा। उन्होंने आगे कहा कि इससे हमें विश्व बैंक और एडीबी से धन प्राप्त करने में और भी मदद मिलेगी। गौरतलब है कि ऋण चुकौती पर दो साल की मोहलत देने वाले पिछले चीनी पत्र को आईएमएफ द्वारा अपर्याप्त माना गया था।
विक्रमसिंघे ने कहा कि आईएमएफ का ये पैकेज अगले चार वर्षों तक रहेगा। इसके जरिए देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और विकास की दिशा में काम करने के लिए सरकार को कई कड़े आर्थिक फैसले लेने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन फैसलों के कारण लोगों को होने वाली कठिनाइयों के लिए मैं माफी मांगना चाहता हूं। गौरतलब है कि इससे पहले देश के हालातों को सुधारने के लिए कर वृद्धि करने, उपयोगिता शुल्क बढ़ाने और ईंधन सब्सिडी समाप्त करने के सरकार के फैसवों के कारण बड़ा राजनीतिक विरोध खड़ा हो गया था।
चीन ने आईएमएफ को लिखा पत्र
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले राहत पैकेज के लिए चीन के एक्जिम बैंक ने श्रीलंका को पुनर्भुगतान पर दो साल की छूट देने और विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) से सहमत होने के लिए आईएमएफ को एक पत्र लिखा था।
बीते साल IMF ने की थी पैकेज की घोषणा
दरअसल, आईएमएफ ने पिछले साल सितंबर में श्रीलंका को 2.9 बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज को चार साल से अधिक के लिए मंजूरी दे दी थी। हालांकि, देश के खराब वित्तीय आर्थिक हालातों और ऋण चूक के बाद आईएमएफ ने इस राहत पैकेज को रोक दिया था। ट्रेजरी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2022 के अंत तक, श्रीलंका पर द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और वाणिज्यिक ऋणों का लगभग 40 बिलियन अमरीकी डालर बकाया था। इसमें, चीनी ऋण कुल ऋण का 20 प्रतिशत और द्विपक्षीय ऋण का 43 प्रतिशत था। इनमें से श्रीलंका को 10.9 बिलियन डॉलर द्विपक्षीय कर्ज लेकर, 9.3 बिलियन डॉलर बहुपक्षीय कर्ज के जरिए, और 14.8 बिलियन डॉलर व्यापारिक ऋण लेकर चुकाना है। श्रीलंका की कुल अर्थव्यवस्था 84.5 बिलियन डॉलर की है।