श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किए जाने की अफवाहों को देश की सत्तारूढ़ पार्टी श्रीलंका पोडुजना पेरमुना (एसएलपीपी) ने सोमवार खारिज कर दिया। 77 वर्षीय नेता राजपक्षे ने विभिन्न अवसरों पर श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में कार्य किया है। महिंदा राजपक्षे ने आर्थिक संकट के कारण बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच पिछले साल मई में द्वीप राष्ट्र के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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महिंदा राजपक्षे के अलावा उनके छोटे भाई और देश के तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को भी इस्तीफा देना पड़ा था, क्योंकि जनता ने पूरे राजपक्षे परिवार पर अर्थव्यवस्था को खराब करने और भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, जिसके कारण देश गहरे वित्तीय संकट में पड़ गया था।
अटकलें लगाई जा रही थीं कि राजपक्षे पिछले शुक्रवार को शपथ लेंगे। लेकिन, एसएलपीपी ने सोमवार को ऐसी किसी भी संभावना का खंडन किया। एसएलपीपी पार्टी महासचिव सागर करियावासम (Sagara Kariyawasam) ने संवाददाताओं से कहा, महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है और एसएलपीपी ने राष्ट्रपति से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।
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राजधानी और आस-पास के उपनगरों में तैनात विशेष सुरक्षा अभियान के कारण अफवाहों को बल मिला था। सशस्त्र सैनिकों को औचक सुरक्षा जांच करते हुए सड़कों पर तैनात देखा गया जबकि महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पुलिस सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा तैनाती इस खुफिया सूचना पर आधारित थी कि एक समूह शहर में परेशानी पैदा करने की योजना बना रहा है।
महिंदा राजपक्षे को वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे द्वारा प्रतिस्थापित (Replaced) किया गया था। गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे के दो महीने बाद विक्रमसिंघे ने राष्ट्रपति के रूप में उनकी जगह ली थी। विक्रमसिंघे 2024 के अंत तक गोटाबाया राजपक्षे की शेष अवधि तक इस पद पर बने रहेंगे।