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Sri Lanka: श्रीलंका में चुनाव प्रणाली बदलने के लिए जनमत संग्रह करवाएंगे विक्रमसिंघे

Wed, 12 Oct 2022 05:01 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Sri Lanka: राष्ट्रपति ने पेशवर समूहों के सदस्यों की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश के ज्यादातर लोग मौजूदा चुनाव प्रणाली को ठुकरा चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में राजनीतिक भ्रष्टाचार का मुख्य कारण देश की प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम (विभिन्न उम्मीदवारों को क्रमिक रूप से वोट देने की प्रणाली) है...
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Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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श्रीलंका में मौजूदा चुनाव प्रणाली रहे या नहीं, इस सवाल पर जनमत संग्रह कराया जाएगा। ये बात राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कही है। सरकार की योजना स्थानीय निकायों के लिए चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या घटाने की भी है। अभी आठ हजार सदस्य इन निकायों के लिए चुने जाते हैं। लेकिन अगर विक्रमसिंघे सरकार की मंशा पूरी हुई, तो ये तादाद चार हजार के करीब रह जाएगी। राष्ट्रपति जिन निकायों की सदस्य संख्या घटाना चाहते हैं, उनमें महानगरीय परिषद, नगरीय परिषद और प्रदेशीय परिषद शामिल हैं।

इस बयान से देश में चुनाव प्रणाली को बदलने की राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की इच्छा फिर चर्चा में आ गई है। इस मुद्दे पर देश में आम सहमति नहीं है। अब इस मामले में विवाद गरमाने की संभावना है। विक्रमसिंघे ने चुनाव प्रणाली बदलने के प्रस्ताव पर विचार के लिए एक संसदीय समिति का गठन करने का एलान किया है। राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ये समिति जुलाई 2023 तक इस बारे में कोई ठोस सुझाव देने में नाकाम रही है, तो देश में जनमत संग्रह कराया जाएगा।

राष्ट्रपति ने पेशवर समूहों के सदस्यों की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश के ज्यादातर लोग मौजूदा चुनाव प्रणाली को ठुकरा चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में राजनीतिक भ्रष्टाचार का मुख्य कारण देश की प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम (विभिन्न उम्मीदवारों को क्रमिक रूप से वोट देने की प्रणाली) है। उन्होंने कहा कि इसके बदले देश में एकल और आनुपातिक मतदान व्यवस्थाओं की मिश्रित प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। साथ ही चुनाव प्रचार पर खर्च होने वाले धन की सीमा तय की जानी चाहिए।

आलोचकों का कहना है कि विक्रमसिंघे सरकार देश को आर्थिक मुसीबत से राहत देने में बिल्कुल नाकाम रही है। जिस समय सबसे जरूरी काम लोगों की आम आर्थिक जिंदगी बहाल करना है, राष्ट्रपति निर्वाचन प्रणाली में बदलाव की बहस लोगों का ध्यान भटकाने के लिए आगे बढ़ा रहे हैं। कई विपक्षी सांसद पहले कह चुके हैं कि विक्रमसिंघे प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं हैं। उन्हें आपातकालीन प्रावधान के तहत चुना गया है। ऐसे में चुनाव प्रणाली में बुनियादी बदलाव लाने से मुद्दों से दूर रहना चाहिए। अब यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि देश का बहुमत मौजूदा चुनाव प्रणाली को ठुकरा चुका है, यह कहने का क्या आधार विक्रमसिंघे के पास है?

लेकिन विक्रमसिंघे ने कहा कि बहुत से लोग प्रिफेरेंशियल सिस्टम के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इस सिस्टम को अपनाने के बारे में जरूरी विचार-विमर्श नहीं किया गया था। 1988 में अचानक संसद ने इस सिस्टम को अपनाने का फैसला कर लिया। तभी संसद के सदस्यों की संख्या 196 से बढ़ा कर 225 करने का निर्णय भी लिया गया था।

विक्रमसिंघे ने कहा कि चुनाव प्रणाली बदलने के मुद्दे पर वे न्याय मंत्री के साथ विचार-विमर्श कर चुके हैं। अब सरकार इसके लिए संसदीय समिति बनाने का प्रस्ताव पेश करेगी। इस समिति से कहा जाएगा कि उसके पास अपनी रिपोर्ट देने के लिए सिर्फ अगले जुलाई तक का समय है। अगर समिति ऐसा करने में नाकाम रही, तो फिर सरकार जनमत संग्रह करवाएगी, ताकि इस मामले में सीधे जनता की राय ली जा सके।

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