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Sri Lanka Crisis: मदद के लिए तरसते श्रीलंका को हर तरफ से हाथ लग रही है मायूसी

Sat, 02 Jul 2022 02:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

विदेशों से अपेक्षित सहायता ना मिलने के कारण श्रीलंका सरकार को अब ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं, जिन्हें अतीत में वह श्रीलंकावासियों के लिए खतरा समझती थी। अब उसने कतर की एक संस्था से मदद स्वीकार कर लेने का फैसला किया है। उस पर श्रीलंका में इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने का इल्जाम लगाया गया था...
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श्रीलंका संकट - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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आर्थिक संकट में लगातार धंसते जा रहे श्रीलंका को इस खबर से जोरदार झटका लगा है कि जापान ने अब उसे मदद न देने का फैसला किया है। अखबार डेली मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोलंबो स्थित जापानी राजदूत मिजुकोशी हिदेयेकी ने गुरुवार को इस बारे में श्रीलंका सरकार को औपचारिक सूचना दी। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में मौजूदा ‘कुप्रबंधन’ को देखते हुए उसे मदद देना जोखिम भरा हो गया है। इसलिए जापान अभी कोई मदद नहीं देगा, हालांकि ये संभव है कि वह बाद में इस पर विचार करे।

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विदेशों से अपेक्षित सहायता ना मिलने के कारण श्रीलंका सरकार को अब ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं, जिन्हें अतीत में वह श्रीलंकावासियों के लिए खतरा समझती थी। गोटबया राजपक्षे सरकार श्रीलंकाई महिलाओं के विदेश जाकर काम करने के मामलों में पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की शर्त पहले ही हटा चुकी है। अब उसने कतर की एक संस्था से मदद स्वीकार कर लेने का फैसला किया है। जबकि कुछ ही समय पहले श्रीलंका सरकार ने इस संस्था के खातों को जाम कर दिया था। तब उस पर श्रीलंका में इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने का इल्जाम लगाया गया था।

कतर से लगाई मदद की गुहार

राष्ट्रपति राजपक्षे सरकार में पुलिस विभाग के मंत्री रह चुके शरत वीरासेकरा ने जनवरी 2021 में संसद में कहा था कि 2019 में हुए ईस्टर बम धमाकों के मास्टरमाइंड जहरान हाशिम को कतर की इस संस्था से मदद मिली थी। इस संस्था का नाम पर्ल ऑफ यूनिटी है। श्रीलंका में इसकी शाखा के प्रमुख हेजाज हिस्बुल्ला रहे हैं, जो पेशे से वकील हैं। वे अभी जेल में हैं। तब वीरासेकरा ने दावा किया था कि इस कतरी संस्था पर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगा रखा है।

इस संस्था के खाते जब्त करने का कतर और आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (ओआईसी) ने कड़ा विरोध किया था। 2020 में ओआईसी के श्रीलंका के संबंधों में और कड़वाहट आ गई, जब राजपक्षे सरकार ने कोविड-19 से मरे मुसलमानों को दफनाने की इजाजत देने की उसकी अपील ठुकरा दी।

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अब उसी कतर से श्रीलंका ने मदद की गुहार लगाई है। बिजली और ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकरा ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कतर की यात्रा की है। उन्होंने बताया कि 29 जून की दोहा में उनकी पर्ल ऑफ यूनिटी के अधिकारियों से मुलाकात हुई। विजेसेकरा ने एक ट्विट में कहा- ‘मैंने उन्हें बताया कि अटार्नी जनरल ने संस्था के खातों पर से रोक हटाने का फैसला किया है।’

ईंधन की कमी से कारोबार हो रहा ठप

श्रीलंका के रुख में यह बदलाव उस समय आया है, जब देश में ईंधन की कमी के कारण कारोबार ठप होता जा रहा है। विजेसेकरा 26 जून को कतर रवाना हुए थे। तब उन्होंने कहा था कि वहां वे तेल के आयात की संभावना का पता लगाने जा रहे हैं।

वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम ने एक रिपोर्ट में बताया है कि श्रीलंका सरकार ने ईंधन की  सहायता पाने के लिए पश्चिम एशिया के कई देशों से संपर्क किया है। लेकिन इस कोशिश में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली है। पश्चिम एशिया स्थित श्रीलंकाई राजदूतों ने इस वेबसाइट से कहा है कि उस क्षेत्र के देश राजनयिक संबंधों में कड़वाहट आने के बाद से श्रीलंका को ज्यादा अहमियत नहीं दे रहे हैं।

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