भारतीय लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत अंतिम ईंधन शिपमेंट इस महीने श्रीलंका पहुंचेगा। लेकिन भविष्य की आपूर्ति के निर्वाह पर फिलहाल कोई संकेत नहीं है जो भारत की सहायता पर निर्भर है। श्रीलंका में ईंधन की कमी इस कदर है कि लोगों को महीनों तक ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं संकट को देखते हुए श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने नागरिकों से ईंधन और गैस का संयम से उपयोग करने का आग्रह किया है। श्रीलंकाई संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता थी और यह कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से बुद्धिमानी से सोची गई परियोजनाओं को लागू करके ही प्राप्त किया जा सकता है। बता दें कि श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक कि माचिस जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई है।