श्रीलंका के गहरे आर्थिक संकट के बावजूद बंदरगाह वाले शहर कोलंबो में अपना कारोबार शुरू करने को इच्छुक कंपनियों की संख्या में कमी नहीं आई है। कोलंबो शहर से लगे समुद्री तट पर जो द्वीप चीन ने तैयार किया है, उसका बड़ा हिस्सा अभी भी खाली है। ऐसी कंपनियों की बड़ी संख्या है, जिन्हें लगता है कि ये जगह कारोबार के अनुकूल है।
महंगाई, जरूरी चीजों की कमी और विदेशी मुद्रा संकट के कारण श्रीलंका इस समय राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में है। देश भर में भड़के जन विरोध के कारण राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो चुकी है। इसके बावजूद एक कॉमर्शियल बैंक के बड़े अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘यह उम्मीद अभी भी ऊंची है कि कोलंबो पोर्ट सिटी एक गेमचेंजर साबित होगा।’ कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन के अधिकारियों के मुताबिक उनके पास बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं देने वाली, और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों की अर्जियां बड़ी संख्या में हैं। ये कंपनियां पोर्ट सिटी में अपना कारोबार लगाना चाहती हैं।
ज्यादातर कंपनियां हांगकांग की
कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन का गठन श्रीलंका की संसद ने किया है। इसकी जिम्मेदारी निवेश के लिए आई अर्जियों की पड़ताल करना है। कमीशन के अधिकारियों के मुताबिक उनके पास जो अर्जियां हैं, उनमें से ज्यादातर हांगकांग की कंपनियों के हैं। विश्लेषकों के मुताबिक ये कंपनियां हांगकांग पर चीन के कसते शिकंजे से बचने के लिए यहां आना चाहती हैं। हालांकि यह एक विडंबना ही है कि वहां से भाग कर वे उस विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में आना चाहती हैं, जिसे चीन ने बनाया है। कोलंबो पोर्ट सिटी का निर्माण चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के तहत किया जा रहा है। इस पर अब तक 1.4 बिलियन डॉलर की लागत आ चुकी है।
कमीशन के महानिदेशक सालिया विक्रमसुरिया ने निक्कईएशिया से कहा- ‘हांगकांग से हट कर ये कंपनियां एशिया किसी दूसरे स्थल की तलाश में हैँ। इस बारे में वे विवरण तब सार्वजनिक करेंगी, जब उन्हें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए इजाजत मिल जाएगी।’
निर्माण के लिए 2014 में हुआ था समझौता
जानकारों के मुताबिक सिर्फ हांगकांग की कंपनियां ही कोलंबो पोर्ट सिटी में आने के लिए इच्छुक नहीं हैं। बल्कि चर्चा है कि अमेरिका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय अस्पताल और ब्रिटेन का एक सेकेंडरी स्कूल भी अपनी शाखाएं यहां खोलना चाहते हैं। उन्हें 99 साल की लीज पर यहां जमीन देने के बारे में बातचीत चल रही है। ये वार्ताएं उस समय शुरू हुई हैं, जब पोर्ट सिटी परियोजना से जुड़े कोलंबो इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के निर्माण के पहले चरण का कार्य शुरू हुआ है। यह तीन टावरों वाला एक डेवलमेंट कॉम्प्लेक्स होगा।
कोलंबो पोर्ट सिटी की खासियत यह मानी जाती है कि यह सिंगापुर, मुंबई और दुबई जैसे दुनिया के बड़े कारोबार केंद्रों के बीच जो एक खालीपन था, उसे भरने की स्थिति में होगा। इस तरह इसके एक क्षेत्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है। इसका निर्माण के लिए समझौता 2014 में हुआ था, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कोलंबो यात्रा पर आए थे। बताया जाता है कि इसके पूरी तरह तैयार होने में 20 साल लगेंगे। योजना के मुताबिक यहां लग्जरी होटल, आवासीय टावर और वाटरफ्रंट जायदादों का निर्माण होगा, जिससे श्रीलंका को 15 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी।