श्रीलंका में चल रहे आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक संकट का समाधान ढूंढने के प्रयासों के तहत राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे हाल ही में इस्तीफा देने वाले 41 सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। जानकारी के अुसार श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) और राष्ट्रपति राजपक्षे के बीच यह बैठक रविवार को शाम सात बजे होगी। इस निर्णायक और अहम बैठक की जानकारी पूर्व राष्ट्रपति और एसएलएफपी नेता मैत्रीपाला सिरिसरना ने दी।
रविवार की सुबह सिरिसरना ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति राजपक्षे को कम से कम विभागों के साथ राजपक्षे के बिना एक सर्वदलीय मंत्रिमंडल के तहत एक अंतरिम प्रशासन बनाने के लिए मजबूर करना रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि अंतरिम प्रशासन की स्थापना होने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष पद की कार्यकारी शक्तियों को कम करने के लिए संविधान के 19वें संशोधन को अतिरिक्त शक्तियों के साथ फिर से पेश किया जाना चाहिए।
1948 में आजाद होने के बाद से सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में लोग बड़ी संख्या में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं और राष्ट्रपति से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। लोगों को भारी बिजली कटौती और गैस, खाद्य पदार्थों व अन्य जरूरी सामग्रियों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को 'गाले फेस ग्रीन पार्क' में 10 हजार से अधिक लोग एकत्र हुए थे। उन्होंने सरकार के विरोध में पूरा रात प्रदर्शन किया था।
'राष्ट्रपति के सत्ता में रहने तक कम नहीं होगा विरोध'
सिरिसरना ने कहा कि ऐसा लगता है राष्ट्रपति और सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) सरकार के खिलाफ विरोध और आंदोलन तब तक कम नहीं होंगे जब तक राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे सत्ता में रहेंगे। उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया और इसमें समय लगता है। हमारे देश के लोगों को बिजली और भोजन की कमी तथा आसमान छूती महंगाई जैसी वर्तमान समस्याओं के तत्काल समाधान की आवश्यकता है।'
'हालात सुधारने के लिए स्थिर सरकार बनाना जरूरी'
उन्होंने कहा कि अगर हमें इन गंभीर मुद्दों का तत्काल समाधान खोजना है, तो सबसे पहले एक स्थिर सरकार बनाने के लिए कदम उठाने होंगे। एसएलएफपी का मानना है कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके सहयोगियों के बिना एक सर्वदलीय अंतरिम सरकार जनता का विश्वास जीतेगी। पार्टी का कहना है कि 10वें संशोधन के संवैधानिक प्रावधानों को फिर से पेश करने के साथ कार्यपालिका से कोई अनावश्यक निर्देश या आदेश जारी नहीं होंगे।
राष्ट्रपति के खिलाफ विपक्ष के समर्थन में आई टीएनए
उधर, श्रीलंका की प्रमुख तमिल पार्टी कमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) ने एलान किया है कि हम राष्ट्रपति गोटबाया की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने में विपक्ष का सहयोग करने के लिए तैयार हैं। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी समागी जन बलवेगया (एसजेबी) ने शुक्रवार को कहा था कि हम राजपक्षे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे क्योंकि वह इस आर्थिक संकट से जूझ रही जनता की मदद करने में पूरी तरह असफल रही है।
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी
आर्थिक संकट के चलते कोलंबो में लोग अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि यह प्रदर्शन पिछले 2 हफ्तों से चल रहा है। हम चाहते हैं कि यह भ्रष्टाचारी सरकार जाए और राजपक्षे जेल जाएं। हमारे पास न खाना है, न बिजली और न ही पेट्रोल है।
19 श्रीलंकाई नागरिक मंडपम पहुंचे
19 श्रीलंकाई नागरिक शरणार्थी के रूप में रामेश्वरम के मंडपम पहुंचे। हर नागरिक करीब 25,000 रुपये देकर नाव से आए हैं। खुफिया, इमीग्रेशन विभाग और पुलिस द्वारा जांच के बाद सभी श्रीलंकाई नागरिकों को को मंडपम शरणार्थी शिविर में भेजा गया है।
भारत से पहुंचे राशन और सब्जियों से मिली राहत
- घोर आर्थिक संकट के समय भारत से राशन और सब्जियों की मदद राहत बनकर पहुंची है। भारत पड़ोसी देश की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अब तक श्रीलंका को 2,70,000 मीट्रिक टन तेल दिया जा चुका है। अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए 1 बिलियन डॉलर उधारी की घोषणा की जा चुकी है। इससे श्रीलंका को भोजन और इंधन की कीमतें नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी।
- पिछले माह श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर चर्चा की थी। उन्होंने मदद के लिए भारत को धन्यवाद भी दिया था। भारत के रिजर्व बैंक ने श्रीलंका के केंद्रीय बैंक को बकाया भुगतान में मोहलत भी दी है। कोविड-19 के कारण पर्यटन से होने वाली आय बंद होने के कारण श्रीलंका में आर्थिक संकट गहरा गया है। भोजन तक की समस्या होने के कारण उसे पड़ोसी देशों से मदद लेनी पड़ रही है।