श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को नवनियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे का समर्थन मिला है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खराब आर्थिक हालात के लिए राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे और उनके बड़े भाई पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की खराब नीतियां और भ्रष्टाचार जिम्मेदार हैं।
प्रदर्शनकारियों के गुस्से से डरे सांसद छिपे
विक्रमसिंघे मंत्रिमंडल बना रहे हैं। रविवार को उन्होंने चार कैबिनेट मंत्री चुने। एक सांसद की मौत और 78 सांसदों के घरों पर हमले के बाद से ज्यादातर सांसद डरे हुए हैं और सुरक्षित ठिकानों पर छिपे हैं। ये संसद सरकार की ओर से बुलाई गई बैठकों में शामिल होने से भी कतरा रहे हैं। इसी वजह से विक्रमसिंघे को मंत्रिमंडल बनाने में मुश्किल हो रही है।
राष्ट्रपति की अपील, साथ काम करें सांसद
बुद्ध पूर्णिमा से ठीक पहले वेसाक पोया दिवस पर राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने सभी सांसदों से मौजूदा हालात के बारे में गंभीरता से विचार कर साथ में काम करने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात का सामना करने के लिए लचीलापन जरूरी है। देश को मुश्किल हालात से निकालने के लिए जनप्रतिनिधियों को लचीला रुख अपनाकर सरकार की मदद करनी चाहिए। श्रीलंका में भारत के उच्चायोग ने भी वेसाक पोया दिवस की शुभकामनाएं दीं और भगवान बुद्ध से श्रीलंका में हालात बेहतर होने की प्रार्थाना की।
लिट्टे के हमला करने की आशंका
भारत की खुफिया एजेंसियों ने 18 मई को श्रीलंका में लिट्टे के हमले की आशंका जताई है। इसे लेकर श्रीलंका की सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं। श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले की आशंका को लेकर जांच की जा रही है। इसके संबंध में भारत की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों से भी बात की गई है। असल में 18 मई को श्रीलंका के गृहयुद्ध में मारे गए लोगों की स्मृति में मुल्लिवैकल दिवस मनाया जाता है। कुछ लिट्टे समर्थक इसे तमिल नरसंहार दिवस के तौर पर भी मनाते हैं।