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Sri Lanka Crisis: देश में अस्थिरता के बीच मालदीव भागे गोतबाया राजपक्षे, दुनिया के इन देशों के मुखिया भी छोड़ चुके हैं देश

Wed, 13 Jul 2022 09:16 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

श्रीलंका में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। जिस गोटबया राजपक्षे को श्रीलंका की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी ने मसीहा बनाकर देश की सर्वोच्च गद्दी पर बैठाया वहीं देश छोड़कर भाग गए हैं। लेकिन गोटबया अकेले ऐसे राष्ट्रपति नहीं हैं जो देश छोड़कर भागे हैं।
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बिना इस्तीफा दिए देश छोड़ गए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीलंका का राष्ट्रपति भवन पर बीते कुछ दिनों से आम जनता का कब्जा है। वहीं अब हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की ओर से ऐलान किया गया था कि वह 13 जुलाई को पद से इस्तीफा दे देंगे। लेकिन वो बिना इस्तीफा दिए ही देश छोड़कर भाग गए। गोटबया अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जो देश छोड़कर भागे हैं, दुनिया के कई देशों में ऐसे उदाहरण पहले भी देखने को मिले हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।
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अशरफ गनी

d - फोटो : getty images
अफगानिस्तान की सत्ता पर पिछले साल तालिबान ने कब्जा कर लिया था। अमेरिका ने अफगानिस्ता से अपनी सेना को वापस बुला लिया था। जिसके बाद तालिबान ने काबुल पर दो दशक बाद फिर से कब्जा कर लिया। तब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी थे। तालिबान के राजधानी काबुल  पर हमलों के बीच आखिरी घंटों में अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया था और संयुक्त अरब अमीरात भाग गए थे। इसके बाद उनपर पैसे साथ लेकर भागने के भी आरोप लगे। हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया था। देश छोड़ने के अगले दिन गनी ने अफगानिस्तान की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अघर वो देश नहीं छोड़ते तो देश में बहुत खून बहता और वह ऐसा नहीं चाहते थे। 

नवाज शरीफ

Nawaz Sharif - फोटो : PTI
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इन दिनों लंदन में रह रहे हैं। उन्हें दो बार देश छोड़ना पड़ा था। पहली बार साल 1999 में कारगिल युद्ध के उन्होंने देश छोड़ा था। तब वह तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ को हटाना चाहते थे। लेकिन मुशर्रफ को इसकी सूचना मिल गई थी। इसके बाद नवाज शरीफ को नजरबंद कर लिया गया था। बाद में शरीफ को दस साल के लिए सऊदी अरब भेज दिया गया। 

हालांकि साल 2007 में वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपने परिवार संग वतन वापस लौटे। फिर 2013 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। पनामा पेपर में उनका नाम सामने आया तो मुश्किलें फिर बढ़ गईं। सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ पर आजीवन किसी भी सरकारी पद पर आने से रोक लगा दी। जुलाई 2018 में उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया गया और दस साल की कैद सुनाई गई। हालांकि कुछ समय जेल में बिताने के बाद स्वास्थ्य का बहाना बनाकर शरीफ लंदन पहुंच गए। 

परवेज मुशर्रफ

परवेज मुशर्रफ - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2013 में पाकिस्तान के आम चुनाव में नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सत्ता में आई। शरीफ सरकार ने सैन्य तानाशाह और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर देशद्रोह का केस दर्ज किया। परवेज मुशर्रफ 20 जून 2001 से 18 अगस्त 2008 तक राष्ट्रपति रहे। मुशर्रफ को 31 मार्च 2014 को आरोप बनाया गया। इस बीच 18 मार्च 2016 को मुशर्रफ इलाज के लिए दुबई चले गए तब से वह अपने देश नहीं लौटे। 

रजा शाह पहलवी

रजा शाह पहलवी - फोटो : सोशल मीडिया
ईरान में पहलवी वंश का शासन खत्म होने के बाद 1949 में ईरान का नया संविधान लागू हुआ। उस समय रजा शाह पहलवी देश के राजा थे। 1952 में मोहम्मद मोसद्दिक प्रधानमंत्री बने लेकिन 1953 में उनका तख्तापलट हो गया था। इसके बाद शाह पहलवी देश के सर्वेसर्वा हो गए। पहलवी को अमेरिका की कठपुतली माना जाता था। उन्होंने विरोधी नेता आयोतल्लाह रुहोल्लाह खौमनी को 1964 में देश निकाला दे दिया। जनता को ये तख्तापलट और ये कार्रवाई पसंद नहीं आया। फिर 1978 में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। इसे इस्लामिक क्रांति भी कहा जाता है। इसके बाद वह 16 जनवरी 1979 को शाह पहलवी परिवार संग देश छोड़कर अमेरिका पहुंच गए। 
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विक्टर यानुकोविच

विक्टर यानुकोविच - फोटो : सोशल मीडिया
विक्टर यानुकोविच साल 2010 में यूक्रेनी राष्ट्रपति के रूप में चुनाव जीतकर आए थे। उन्होंने रूस के साथ-साथ यूरोपियन यूनियन के साथ भी संबंध बेहतर बनाने का वादा किया। नवंबर 2013 में यूरोपियन यनियन का यूक्रेन के साथ एक समझौता होना था लेकिन यानुकोविच इससे पीछे हटे। इसके बाद यूक्रेन में विद्रोह शुरू हो गया। इसी दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। 22 फरवरी 2014 को यूक्रेन की संसद में यानुकोविच को पद से हटाने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद वह देश छोड़कर रूस भाग गए। 
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