श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण मची अफरातफरी के बीच विपक्षी दलों ने और भी आक्रामक रुख अपना लिया है। ये दल अब राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे और उनके परिवार को सत्ता से हटाने की मुहिम छेड़ने का इरादा दिखा रहे हैं। राजनीतिक संकट के कारण राजपक्षे अपने एक भाई बासिल राजपक्षे को वित्त मंत्री पद से हटा चुके हैं। लेकिन विपक्षी नेताओं की मांग है कि खुद गोटबया इस्तीफा दें। उन्होंने गोटबया राजपक्षे के एक अन्य भाई और प्रधानमंत्री महिंद राजपक्षे पर भी हमले तेज कर दिए हैं।
श्रीलंका के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए राजपक्षे सरकार ने आपातकाल लागू करने का दांव चला। लेकिन वह नाकाम रहा। सरकार को इमरजेंसी हटानी पड़ी है। श्रीलंकाई संसद में 41 सदस्य सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैँ। बताया जाता है कि इस कारण मौजूदा सरकार अल्पमत में आ गई है।
श्रीलंका में संवैधानिक मामलों के जानकार लुवी निरंजन गणेशनाथन ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘अगर कोई सरकार बहुमत खो दे, तो विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश करता है। लेकिन इसके लिए तय संसदीय प्रक्रिया है। ऐसा तुरंत होने की संभावना नजर नहीं आती।’ गणेशनाथन ने बताया कि अगर अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो भी राष्ट्रपति एक नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति कर सकते हैं। उस अवस्था में विपक्ष को संसद को भंग करने का प्रस्ताव लाना होगा। संसद भंग होने के बाद ही नए चुनाव का रास्ता साफ होगा।
जिन 41 सांसदों ने सत्ताधारी गठबंधन से नाता तोड़ लिया है, उन्हें अब निर्दलीय सदस्य का दर्जा मिल गया है। श्रीलंका की संसद में 225 सदस्य हैं। उनके बीच बहुमत के लिए 113 सदस्यों का समर्थन चाहिए। अब महिंद राजपक्षे सरकार के पास सदन में इससे कम सदस्यों का समर्थन ही बचा है।