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श्रीलंका ब्लास्ट: कोर्ट ने पूर्व पुलिस प्रमुख को दी मौत की सजा; एक चूक ने ली थी 260 से ज्यादा लोगों की जान

Sat, 01 Aug 2026 12:38 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, कोलंबो।

सार

श्रीलंका की अदालत ने 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमलों को रोकने में विफल रहने पर पूर्व पुलिस महानिरीक्षक पुजित जयसुंदरा  को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने माना कि खुफिया चेतावनी मिलने के बावजूद दोनों ने जरूरी कार्रवाई नहीं की, जिससे 260 से अधिक लोगों की जान गई।
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श्रीलंका ईस्टर ब्लास्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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श्रीलंका में तीन न्यायाधीशों के उच्च न्यायालय के एक पैनल ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा सुनाई है। दरअसल, अधिकांश न्यायाधीशों ने उन्हें पूर्व खुफिया जानकारी प्राप्त होने के बावजूद भी 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमलों को रोकने में विफल रहने का दोषी पाया।

न्यायाधीशों ने क्या कहा? 

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समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश प्रियानथा लियानागे और थिलाकरत्ने बंदारा ने बहुमत का फैसला सुनाया। वहीं, न्यायाधीश विराज वीरसुरिया ने असहमति वाला फैसला जारी किया। बहुमत के फैसले की घोषणा करते हुए, पीठासीन न्यायाधीश लियानागे ने कहा कि जयसुंदरा उस समय देश के पुलिस प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। नागरिकों की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे।

क्या खुफिया ने हमले की आशंका जताई थी?
अदालत ने कहा कि तत्कालीन राज्य खुफिया सेवा के निदेशक निलंथा जयवर्धना ने 20 अप्रैल, 2019 की शाम को जयसुंदरा को सूचित किया था कि अगले दिन कैथोलिक चर्चों और पर्यटक होटलों पर आत्मघाती हमले होने की आशंका है।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया? 

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हालांकि, अदालत ने कहा कि जयसुंदरा हमलों को रोकने के लिए उपाय करने में विफल रहे। अधिकांश न्यायाधीशों ने कहा कि जयसुंदरा ने अपराध रोकने और जनता की सुरक्षा के लिए नियुक्त राज्य अधिकारी के रूप में अपने दायित्वों की उपेक्षा की थी। उन्होंने अपराधों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मृत्युदंड सुनाया।

असहमति वाले फैसले में क्या कहा गया है? 
अपने असहमति वाले फैसले में, वीरसुरिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष जयसुंदरा के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा और उन्हें बरी कर दिया। अदालत को फैसला सुनाने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।

उसी दिन बाद में, अदालत ने पूर्व रक्षा सचिव हेमसिरी फर्नांडो को भी 2019 के आतंकी हमलों से पहले खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई करने में विफल रहने का दोषी पाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। फैसले के अनुसार, 21 अप्रैल, 2019 को हुए समन्वित बम विस्फोटों में 260 से अधिक लोग मारे गए और 500 से अधिक लोग घायल हुए।

 

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