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पाकिस्तान में कयास: क्या सेना अब इमरान खान के खिलाफ हो गई है? क्यों कर रही है विपक्ष का समर्थन!

Fri, 11 Mar 2022 05:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने मीडिया से अनुरोध किया कि वह इस बारे में अटकलें ना लगाएं। उन्होंने कहा- ‘मैंने पहले भी कहा है कि सेना का सियासत से कोई रिश्ता नहीं है। बेहतर यही होगा कि सभी पक्ष इस मामले में गैरजरूरी अटकलबाजी से बचें।’
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पाक प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान की इमरान सरकार पर मंडरा खतरे के बीच इस सवाल पर कयास जोरों पर हैं कि इस पूरे मामले में सेना क्या भूमिका निभाएगी। पाकिस्तान में सरकारों का भविष्य तय करने में अकसर सेना की भूमिका अहम समझी जाती है। इसीलिए विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सेना के रुख को लेकर चर्चा तेज है।

सेना का इंकार

कयासों का बाजार इतना गर्म है कि इसके बीच पाकिस्तान की सेना को सफाई देनी पड़ी है। सेना के जनसंपर्क विभाग के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि सेना का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने मीडिया से अनुरोध किया कि वह इस बारे में अटकलें ना लगाएं। उन्होंने कहा- ‘मैंने पहले भी कहा है कि सेना का सियासत से कोई रिश्ता नहीं है। बेहतर यही होगा कि सभी पक्ष इस मामले में गैरजरूरी अटकलबाजी से बचें।’

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सियासी हलकों में अटकल यह लगाई गई है कि सेना अब विपक्ष का समर्थन कर रही है। सियासी सूत्रों के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि सेना से हरी झंडी पाने के बाद ही विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इन खबरों के बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री चौधरी फव्वाद हुसैन ने गुरुवार को दावा किया कि सेना संविधान की व्यवस्था के अनुरूप सरकार के साथ खड़ी है।

चौधरी हुसैन ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बात एक संवाददाता के सवाल पर कही। संवाददाता ने कहा था- ऐसी धारणा बनी है कि इमरान खान को उनके पद से हटाने की कोशिश में अब सैन्य एस्टबलिशमेंट का समर्थन विपक्ष के साथ है। इस हुसैन ने कहा- हमारी संवैधानिक व्यवस्था के तहत सेना के लिए अनिवार्य है कि वह सरकार के साथ रहे। सेना के लिए संविधान का अनुपालन अनिवार्य है और वह संविधान के मुताबिक ही काम करेगी।

गिर सकती है इमरान सरकार

लेकिन चौधरी फव्वाद हुसैन ने भी सेना को सियासत में घसीटने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जो नेता अविश्वास प्रस्ताव लाने से जुड़े हुए हैं, वे सेना विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सेना को अपने नियंत्रण में लेने की अधूरी इच्छा को पूरी करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। हुसैन ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ऐसे कई वीडियो क्लिप और खबरों की कतरनें दिखाईं, और उनके आधार पर दावा किया कि विपक्षी नेता अतीत में सेना विरोधी बयान दे चुके हैं।

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इस बीच पाकिस्तान के सियासी और मीडिया हलकों में इमरान खान सरकार के गिरने के कयास तेज होते जा रहे हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि प्रधानमंत्री खान के चार साल के कार्यकाल में अब जितनी मजबूत चुनौती उनके सामने आई है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन इमरान खान और उनके समर्थकों की तरफ से लगातार दावा किया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव नाकाम हो जाएगा। जबकि विपक्ष अपनी गोलबंदी कोशिश जारी रखे हुए है। उसका दावा है कि सत्ताधारी दल के लगभग दो दर्जन सांसद उसके संपर्क में हैं, जो संसद में सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे।

दो महीनों के हमलों में 14 पुलिसकर्मी मारे गए, 24 घायल
इधर, पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत एक अलग की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पिछले दो माह में प्रांत के भीतर हुए हमलों में कम से कम 14 पाकिस्तानी पुलिसकर्मी मारे गए और 24 घायल हुए हैं। खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ ने बताया कि कई जिलों में पुलिस कर्मियों पर हमले की सूचना मिली है। 

उन्होंने बताया कि डेरा इस्माइल खान और कोहाट में पोलियो टीमों पर हुए हमले में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इसके अलावा, पेशावर में दो, मर्दन में तीन, हजारा में एक, कोहाट में चार और बन्नू में तीन पुलिसकर्मियों की जान चली गई। उन्होंने बताया कि प्रांतीय राजधानी में आठ पुलिसकर्मी, मर्दान में एक, हजारा में तीन, बन्नू में दो और डेरा इस्माइल खान में 10 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

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