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मेकअप के खिलाफ दक्षिण कोरिया की महिलाओं ने छेड़ी जंग

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 12 Jan 2019 03:36 PM IST

सार

  • मेकअप के खिलाफ शुरू हुआ नारीवादी आंदोलन।
  • बिना मेकअप के स्कूल भी नहीं जाती थीं।
  • मेकअप न करने वालों के साथ होता है गलत व्यवहार।
  • नौकरी के लिए भी मेकअप है जरूरी।
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दक्षिण कोरिया में मेकअप के खिलाफ जंग

दक्षिण कोरिया की बाकी महिलाओं की तरह ही बाइ इयुजिओंग भी कभी बना मेकअप के घर से बाहर नहीं निकली थी। वह अपने प्राकृतिक चेहरे से नफरत करने लगी थी। बाइ को मेकअप करने में रोज दो घंटे का समय लगता था। जिसके कारण उसे सोने और खाना खाने का भी समय नहीं मिल पाता था। स्कूल जाने से पहले भी बाई की यही स्थिति थी।

केवल इतना ही नहीं पास के बाजार से घर का सामान लाने से पहले भी बाई मेकअप करना नहीं भूलती थी। बाइ का कहना है, "अगर मैं बिना मेकअप के बाहर निकलती तो मुझे अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी लगती थी। कोई मेरी ओर देखता तो मुझे शर्मिंदगी महसूस होती। मैं अपने असली चेहरे से नफरत करने लगती।" बता दें बाई की उम्र अभी महज 21 साल है। वह अगर एक घंटे के लिए भी घर से बाहर जाती तो मेकअप करना नहीं भूलती थी। 



दक्षिण कोरियाई समाज में अच्छा दिखना बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से ब्यूटी पार्लर, मेकअप और ब्यूटी प्रोड्क्ट्स का बाजार वहां बहुत फल फूल रहा है। वहां बेहतर दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराना भी आम है, लेकिन अब कुछ दक्षिण कोरियाई महिलाएं खूबसूरती के परंपरागत पैमानों को चुनौती दे रही हैं और मेकअप के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं।

मेकअप के खिलाफ ये आंदोलन तब शुरू हुआ, जब दक्षिण कोरिया की महिलाएं एक-एक करके अपने सौंदर्य प्रसाधनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने लगीं। सौंदर्य प्रसाधनों को तोड़ते हुए महिलाओं द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुआ। वीडियो को देखकर ऐसा लगता है की जैसे किसी खूबसूरत कला का प्रदर्शन किया जा रहा हो।

लेकिन ये किसी कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मेकअप के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने का विरोध प्रदर्शन है। दरअसल मी टू आंदोलन से प्रेरित होकर दक्षिण कोरिया की महिलाएं अपने देश में महिलाओं के लिए अनिवार्य मेकअप के परंपरागत पैमानों को चुनौती दे रही हैं। 

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दक्षिण कोरिया में मेकअप के खिलाफ जंग
दक्षिण कोरिया की बाकी महिलाओं की तरह ही बाइ इयुजिओंग भी कभी बना मेकअप के घर से बाहर नहीं निकली थी। वह अपने प्राकृतिक चेहरे से नफरत करने लगी थी। बाइ को मेकअप करने में रोज दो घंटे का समय लगता था। जिसके कारण उसे सोने और खाना खाने का भी समय नहीं मिल पाता था। स्कूल जाने से पहले भी बाई की यही स्थिति थी।

केवल इतना ही नहीं पास के बाजार से घर का सामान लाने से पहले भी बाई मेकअप करना नहीं भूलती थी। बाइ का कहना है, "अगर मैं बिना मेकअप के बाहर निकलती तो मुझे अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी लगती थी। कोई मेरी ओर देखता तो मुझे शर्मिंदगी महसूस होती। मैं अपने असली चेहरे से नफरत करने लगती।" बता दें बाई की उम्र अभी महज 21 साल है। वह अगर एक घंटे के लिए भी घर से बाहर जाती तो मेकअप करना नहीं भूलती थी। 

दक्षिण कोरियाई समाज में अच्छा दिखना बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से ब्यूटी पार्लर, मेकअप और ब्यूटी प्रोड्क्ट्स का बाजार वहां बहुत फल फूल रहा है। वहां बेहतर दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराना भी आम है, लेकिन अब कुछ दक्षिण कोरियाई महिलाएं खूबसूरती के परंपरागत पैमानों को चुनौती दे रही हैं और मेकअप के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं।

मेकअप के खिलाफ ये आंदोलन तब शुरू हुआ, जब दक्षिण कोरिया की महिलाएं एक-एक करके अपने सौंदर्य प्रसाधनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने लगीं। सौंदर्य प्रसाधनों को तोड़ते हुए महिलाओं द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुआ। वीडियो को देखकर ऐसा लगता है की जैसे किसी खूबसूरत कला का प्रदर्शन किया जा रहा हो।

लेकिन ये किसी कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मेकअप के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने का विरोध प्रदर्शन है। दरअसल मी टू आंदोलन से प्रेरित होकर दक्षिण कोरिया की महिलाएं अपने देश में महिलाओं के लिए अनिवार्य मेकअप के परंपरागत पैमानों को चुनौती दे रही हैं। 

bae
बाई भी उन्हीं महिलाओं में से एक है जो इस जंग को लड़ रही है। वह एक यूट्यूब स्टार है। अपने चैनल पर वह मेकअप करना सिखाती है। वह यूट्यूब पर लीना बाई के नाम से मशहूर है। हाल ही में उसने अपनी वीडियो के कमेंट में देखा कि कुछ युवा लड़कियां कह रही थीं कि वह बिना मेकअप के बाहर जाने में शर्म महसूस करती हैं। एक अन्य फैन ने कहा कि उसे बिना मेकअप के बाहर जाने में आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है।

बाइ इन सभी कमेंट्स को देखने के बाद आश्चर्य में रह गई कि 13 साल की लड़कियां भी बिना मेकअप के बाहर नहीं जाना चाहतीं। इसके बाद बाइ ने एक वीडियो पोस्ट की। इस वीडिया का टाइटल रखा "मैं खूबसूरत नहीं हूं।" इस वीडियो में पहले बाई ने मेकअप लगाया और बाद में हटा दिया। वीडियो में उसे बेहद भद्दे कमेंट भी मिले। जैसे "एक सूअर ने मेकअप लगा लिया है।" तो कोई कमेंट करता,"अगर मेरा ऐसा चेहरा होता तो मैं सुसाइट कर लेती।" लेकिन बाई ने इन कमेंट के जवाब में कहा, यह ठीक है, कि आप सुंदर नहीं हैं। इस वीडियो को 6.3 मिलियन लोगों ने देखा। 

बाइ का कहना है कि उसने ये वीडिया इसलिए शेयर किया ताकि अधिक से अधिक लोग इस शर्मिंदगी से बाहर निकलें कि वह बिना मेकअप के खूबसूरत नहीं लगते। बाई की ही तरह अन्य महिलाएं भी अब मेकअप के खिलाफ जंग छेड़ चुकी हैं। यह एक तरह का नारीवादी आंदोलन है, जिसे "एस्केप द कोरसेट" कहा जा रहा है। इस आंदोलन में मेकअप के अलावा मोटा शरीर और टाइट कपड़ों के लिए भी जंग शामिल है। महिलाएं सुंदर दिखने के लिए टाइट कपड़े नहीं पहनना चाहतीं। साथ ही कुछ महिलाएं अपने मोटे शरीर को ही पसंद करती हैं, वो पतला नहीं होना चाहती। खासतौर पर जब लोगों के लिए खुद को पतला करने का दबाव बने।

बता दें कि दुनिया में सबसे अधिक कॉस्मेटिक सर्जरी दर दक्षिण कोरिया में है और सबसे बड़ा सौंदर्य प्रसाधनों का बाजार भी दक्षिण कोरिया को ही माना जाता है। पिछले वर्ष इस देश ने सौंदर्य बाजार के जरिये 13 बिलियन डॉलर की कमाई की थी।

इसके पीछे बड़ी वजह सिर्फ ये नहीं है कि दक्षिण कोरिया की महिलाएं मेकअप के परंपरागत पैमानों को तोड़ना चाहती हैं, बल्कि ये औरतें कसे हुए कपड़ों, कोरिया के मशहूर बाउल हेअरकट और चश्मों के खिलाफ भी हैं। महिलाओं के मुताबिक इन चीजों को त्यागने से वे प्रति महीने 100 डॉलर खर्च होने से बचा लेती हैं।अपनी छोटी सी आजादी के लिए आंदोलन करती महिलाओं को समर्थन कम, गालियां और जान से मारने की धमकी अधिक मिली रही हैं। 

हालांकि मेकअप के खिलाफ इस आंदोलन का कई हस्तियों ने समर्थन किया है। 'गुड प्लेस' की अभिनेत्री जमीला जमील ने अपनी सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर एक आंदोलन 'आई वेघ मूवमेंट (तुलनात्मक आंदोलन) की शुरुआत की है। इस आंदोलन का मकसद लोगों को ये समझाना है कि लोगों को उनकी विशेषताओं और प्रतिभा के दम पर तोलना चाहिए न कि उनके वजन पर तोला जाना चाहिए।

ये आंदोलन सीधे तौर पर 'बॉडी शेमिंग' पर निशाना साधता है। महिलाओं द्वारा शुरू किये गए इन छोटे-छोटे आंदोलनों का सीधा उद्देश्य ये है कि लोगों को अपनी विकृत सोच से बाहर आना होगा। 
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