दक्षिण कोरिया में लगातार बवाल मचा हुआ है। यहां के हालात तब ज्यादा बदतर हो गए, जब तीन दिसंबर की रात राष्ट्रपति यून सुक-योल ने इमरजेंसी यानी मार्शल लॉ लगाने का एलान किया। हालांकि, भारी विरोध के बाद कुछ ही घंटों बाद इसे समाप्त कर दिया गया था। मगर योल के इस फैसले के बाद उनकी लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले महाभियोग लगाने की मांग का सामना कर रहे थे। भले ही इससे उन्होंने खुद को बचा लिया। मगर, अब उनपर एक और शिकंजा कसने की बात कही जा रही है। दरअसल, जानकारी सामने आई है कि दक्षिण कोरिया के भ्रष्टाचार जांच प्रमुख ने मार्शल लॉ के फरमान को लेकर राष्ट्रपति योल के विदेश यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।
छह घंटे चले मार्शल लॉ ने देश को बुरी तरह हिला कर रख दिया
दक्षिण कोरिया में हाल ही में एक बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिला। राष्ट्रपति यून सुक योल ने बुधवार को मार्शल लॉ (सैन्य शासन) घोषित कर दिया था, यह आरोप लगाते हुए कि विपक्ष देश की लोकतंत्र और स्थिरता के लिए खतरा बन रहा है। यह निर्णय देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चौंकाने वाला था, क्योंकि यह चार दशकों में पहली बार था जब दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लगाया गया। सेना ने संसद को चारों ओर से घेर लिया था और सियोल की सड़कों पर सैनिक तैनात कर दिए गए थे। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद, राष्ट्रपति ने इस निर्णय को वापस ले लिया। यह कदम जनता के विरोध और नेशनल असेंबली की कड़ी आलोचना के बाद लिया गया था। दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ केवल लगभग छह घंटे चला। हालांकि चंद घटों के लिए लागू हुए मार्शल लॉ ने देश की राजनीतिक को हिला कर रख दिया। राष्ट्रपति योल के इस फैसले के खिलाफ विपक्ष समेत देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। उनकी खुद की पार्टी में ही उनका विरोध शुरू हो गया है। विपक्ष योल के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रस्ताव रहा विफल
मार्शल लॉ के कारण विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति यून पर महाभियोग लगाने का प्रयास किया। हालांकि, यह प्रस्ताव असफल हो गया क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी के ज्यादातर सांसदों ने वोटिंग का बहिष्कार किया। देश में महाभियोग के लिए 300 सीटों वाली संसद में 200 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन विपक्ष के पास केवल 192 सीटें थीं। सत्तारूढ़ पार्टी के केवल तीन सांसदों ने वोटिंग में भाग लिया, जिससे प्रस्ताव खारिज हो गया। वहीं नेशनल असेंबली के स्पीकर ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया। विपक्षी दल अगले हफ्ते नए सत्र में फिर से महाभियोग का प्रस्ताव ला सकते हैं।
नो-फ्लाई लिस्ट में हो सकता है नाम शामिल
कई मीडिया रिपोर्ट ने पहले ही बताया था कि पुलिस विद्रोह के आरोपों की जांच करते हुए यून को देश छोड़ने से रोकने पर विचार कर रही है। राष्ट्रपति का नाम नो-फ्लाई लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पुलिस ने इस बारे में फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया था। मगर अब जानकारी सामने आई है कि राष्ट्रपति के यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
दक्षिण कोरिया के न्याय मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति योल पर मार्शल लॉ की जांच के लिए यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने यून के मार्शल लॉ लागू करने को असंवैधानिक, अवैध विद्रोह या तख्तापलट कहा। विपक्षियों ने कथित विद्रोह को लेकर यून और पूर्व रक्षा मंत्री सहित कम से कम नौ लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
मार्शल लॉ के फैसले में भूमिका के लिए रक्षा मंत्री गिरफ्तार
इसके बाद राष्ट्रपति यून ने अपने रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अब उन्हें मार्शल लॉ के फैसले में उनकी भूमिका के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, किम योंग-ह्यून पर यात्रा प्रतिबंध भी लगा दिया गया है और मामले की जांच चल रही है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया, जो इस ऑपरेशन में शामिल थे।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि उसने मार्शल लॉ ऑपरेशन में शामिल तीन वरिष्ठ कमांडरों को निलंबित कर दिया है, जिसके तहत सैनिकों को संसद में तैनात किया गया था।