दक्षिण कोरिया की संसद में शनिवार को राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव विफल हो गया। सत्तारूढ़ पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) द्वारा मतदान का बहिष्कार होने के कारण प्रस्ताव विफल हो गया। एसोसिएटेड प्रेस ने यह जानकारी दी।
छह घंटे तक लागू रहा मार्शल लॉ
इस हफ्ते राष्ट्रपति सुक-योल ने मार्शल लॉ लागू किया था, जिससे मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और कुछ अन्य छोटे दलों ने राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया। मार्शल लॉ सिर्फ छह घंटों तक ही लागू रहा, क्योंकि नेशनल असेंबली (संसद) में मतदान कराया गया और राष्ट्रपति के आदेश को पलट दिया गया और उनके मंत्रिमंडल को इसे हटाने के लिए मजबूर किया गया।
एक दिन पहले पीपुल्स पावर पार्टी के प्रमुख हान डोंग-हुन ने शुक्रवार को कहा था कि राष्ट्रपति यून सुक-योल की संवैधानिक शक्तियों को निलंबित करना जरूरी है। डोंग-हुन के बयान से संकेत मिल रहा था कि अब उनकी पार्टी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाने पर विचार कर सकती है, जो पहले इसका विरोध कर रही थी।
प्रथम महिला कियोन ही को भी राहत
इससे पहले, संसद ने आज एक और प्रस्ताव को विफल हुआ, जिसमें राष्ट्रपति यून सुक-योल की पत्नी किम कियोन-ही के खिलाफ विशेष जांच शुरू करने की मांग की गई थी। विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को पेश किया था, क्योंकि कियोन-ही पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे थे। विपक्षी दल चाहते थे कि एक विशेष जांच आयोग बनाया जाए, जो इन आरोपों की जांच करे।
किम कियोन ही कौन हैं
कियोन-ही का नाम पहले म्यॉन्ग-सिन था। लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम किम कियोन रखा। वह 2022 में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला हैं। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि वह चाहती हैं कि उन्हें 'राष्ट्रपति की पत्नी' के रूप में ही जाना जाए। कियोन ही एक कला प्रदर्शनी कंपनी कोनावा कॉन्टेंट्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी हैं।
पति सुक-योल के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कियोन ही विवादों में रही हैं, खासकर उनकी शैक्षिक योग्यता को लेकर। 2021 में उन पर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस से अपने संबंध को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगा था। बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि वह अब राष्ट्रपति की पत्नी के रूप में सिर्फ अपने दायित्वों पर फोकस करेंगी।
कियोन ही ने कुकमिन यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी की है। उन पर आरोप लगे थे कि उनके शोधपत्र में साहित्यिक चोरी थी। हालांकि कुकमिन यूनिवर्सिटी ने उन्हें इस आरोप से मुक्त कर दिया था और कहा था कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। लेकिन फिर एक बाहरी विशेषज्ञों के समूह ने इन आरोपों की जांच की और पाया कि कियोन ही के मास्टर और पीएचडी के शोध पत्रों में कुछ हिस्से चोरी के थे। इस समूह की रिपोर्ट में साबित किया गया था कि साहित्यिक चोरी हुई थी।
कियोन ही पर ताजा आरोप क्या हैं
किम कियोन पर दो मुख्य आरोप हैं, जिनकी जांच के लिए नेशनल असेंबली में पेश किए गए प्रस्ताव में विशेष वकील की नियुक्ति की मांग की गई थी। कियोन ही पर पहला आरोप 63.6 बिलियन वॉन (करीब 500 करोड़ रुपये) के स्टॉक मैनुपुलेशन से जुड़ा है। आरोप लगाया गया है कि किम कियोन ही औऱ उनकी मां के नाम पर कुछ खातों का प्रबंधन एक स्टॉक मैनिपुलेटर द्वारा किया गया था। इन खातों के लेन-देन ने पूंजी बाजार अधिनियम का उल्लंघन किया था। हालांकि, किम कियोन ही के खिलाफ आरोपों को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उन्हें इस बात का पता नहीं था कि उनके खातों का उपयोग इस तरह के लेन-देन के लिए किया जा रहा था।
उन पर दूसरा आरोप यह है कि उन्होंने खुद को एक राजनीतिक सलाहकार बताने वाले म्युंग ते-क्यून के साथ मिलकर चुनाव परिणाम में राष्ट्रपति सुक-योल के पक्ष में हेराफेरी की थी। देश की भ्रष्टाचार जांच एजेंसी म्युंग ते-क्यून की जांच कर रही है।
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