दक्षिण कोरिया और जापान में महिलाओं के शादी नहीं करने से आर्थिक संकट पैदा होने का खतरा बढ़ रहा है। इन दोनों देशों की महिलाओं के कई ऐसे समूह हैं जो शादी और मां बनने से परहेज कर रही हैं। दोनों देश दुनिया में सबसे कम जन्म दर वाले देशों में शामिल हो गए हैं। सबसे कम जन्म दर वाले देशों में जापान पहले तो दक्षिण कोरिया आठवें स्थान पर हैं।
दक्षिण कोरिया में तो कई महिलाएं 'नो मैरिज वुमन' अभियान चला रही है। इसके जरिए महिलाओं को चार चीजों से बचने की सलाह दी जा रही है। इन महिलाओं से कहा जा रहा है कि वो नो डेटिंग, नो सेक्स, नो मैरिज और नो चिल्ड्रन पर विश्वास करें।
महिलाओं की शादी की दरों की कमी की वजह से कई मैरिज हॉल बंद हो गए हैं। यहां सरकार इस संकट से इतनी चिंतित है कि युवाओं को शादी के लिए प्रोत्साहित कर रही है और युवाओं को शादी के लिए पैसा दे रही है।
दक्षिण कोरिया के हालात कितने बिगड़ गए हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दशक पहले किए गए सर्वेक्षण में लगभग 47% कोरियाई महिलाओं का मानना था कि शादी जरूरी है। लेकिन पिछले साल किए गए सर्वेक्षण में हैरान करने वाले नतीजे सामने आए, इस सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 22.4% महिलाएं ही मानती है कि शादी जरूरी है।
दक्षिण कोरिया की सरकार शादी करने और पिता बनने के लिए प्रोत्साहन योजना चला रही है। यहां के कई प्रांतों में तो सरकार महिलाओं से उनकी लंबाई, वजन, फोटो और बायोडाटा मांग रही है। जनसंख्या में हो रही गिरावट से दक्षिण कोरिया में श्रम शक्ति प्रभावित हो रही है। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में तो 20 फीसदी से ज्यादा मैरिज हॉल बंद हो चुके हैं। सिओल के कई विद्यालयों में पढ़ने के लिए बच्चों की कमी के कारण स्कूल तक बंद किए जा रहे हैं।
जापान में महिलाओं से बच्चे पैदा करने को कहा जा रहा
जापान की आबादी तेजी से बुढ़ापे की तरफ बढ़ रही है। जिस कारण समाज और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ रहा है। कोरिया की ही तरह जापान के युवा भी शादी से इनकार कर रहे हैं। कम बच्चे और कम युवा आबादी देश के लिए संकट बनी हुई है। इस कारण सरकार को महिलाओं से अनुरोध करना पड़ रहा है कि वह दूसरे बच्चे को भी जन्म दें, ताकि युवा जनसंख्या को बढ़ाया जा सके। साथ ही देश की जन्म दर भी बढ़ सके।