बिना अमेरिका का नाम लिए जयशंकर ने कहा, कुछ देश वैश्विक संघर्षों के प्रति जिस तरह का रवैया अपनाते हैं, उसमें दोहरे मानदंड स्पष्ट दिखाई देते हैं। पहले से ही नाजुक आर्थिक माहौल में ऊर्जा जैसी जरूरी चीजों को और अनिश्चित बनाना किसी का भला नहीं करता बल्कि केवल मतभेदों को और गहरा करता है।
जयशंकर दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। जयशंकर ने अपने भाषण का केंद्र शांति और विकास के बीच संबंधों पर रखा। उन्होंने कहा, शांति निश्चित रूप से विकास को संभव बना सकती है, लेकिन विकास को खतरे में डालकर हम शांति को बढ़ावा नहीं दे सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बातचीत और कूटनीति की ओर बढ़ने का आग्रह किया। इस दौरान विदेश मंत्री ने आतंकवाद को विकास के लिए एक स्थायी खतरा बताया और कहा कि विश्व समुदाय को इसके प्रति न तो सहिष्णुता दिखानी चाहिए और न ही कोई रियायत देनी चाहिए। जयशंकर ने स्पष्ट कहा, विकास के लिए सबसे बड़ा व्यवधान आतंकवाद है।
यूक्रेन और गाजा युद्ध ने ग्लोबल साउथ पर गंभीर असर डाला
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि यूक्रेन और गाजा युद्ध ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) पर गंभीर असर डाला है। ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति शृंखलाएं और लॉजिस्टिक्स बाधित हुए हैं, जिससे न केवल उपलब्धता बल्कि लागत भी कई देशों के लिए बड़ा दबाव बन गई है। जयशंकर ने दोहरे मानदंडों पर भी सवाल उठाए और कहा कि शांति विकास को संभव बनाती है, लेकिन विकास को बाधित करना शांति की राह नहीं खोल सकता। उन्होंने संवाद और कूटनीति से संघर्ष विराम करने पर जोर दिया।
दुनिया राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अस्थिर
विदेश मंत्री ने कहा, आज की अंतरराष्ट्रीय स्थिति राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से अस्थिर है। जी-20 सदस्य होने के नाते हमारी विशेष जिम्मेदारी है कि हम स्थिरता को मजबूत करें और इसे सकारात्मक दिशा दें। यह काम संवाद और कूटनीति, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, तथा ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने से ही संभव है।
स्वास्थ्य सेवा और आईटी में सहयोग प्राथमिकता
इससे पहले जयशंकर ने हिंद-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच पर कहा भारत की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवा, आईटी, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है। विदेश मंत्री ने भारत और प्रशांत द्वीपीय देशों की विकास साझेदारी और दोनों पक्षों के पूरी तरह जन-केंद्रित एजेंडे पर जोर दिया।
दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि आज की बदलती दुनिया में वैश्विक कार्यबल की आवश्यकता अनिवार्य है और कई देशों की राष्ट्रीय जनसांख्यिकी के कारण इस मांग को केवल स्थानीय स्तर पर पूरा करना संभव नहीं है। तकनीक और व्यापार के बदलते खेल में वैश्विक कार्यबल ही भविष्य का आधार है और इसके लिए देशों को तैयार रहना होगा। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के अवसर पर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) की ओर से आयोजित कार्यक्रम ‘एट द हार्ट ऑफ डेवलपमेंट: एड, ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी’ में कही। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक कार्यबल को एक आधुनिक, कुशल और स्वीकार्य मॉडल के रूप में तैयार करना होगा, जिसे वितरित वैश्विक कार्यस्थलों में रखा जा सके।