चीन के गांवों में हाल के वर्षों में तेजी से सोलर पैनल लगाए गए हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि गांवों में अब बिजली लगातार बनी रहती है। इससे गांवों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस बात का नजारा चीन के उत्तरी प्रांतों में देखने को मिल रहा है, जिन्हें आमतौर पर ज्यादा गरीब माना जाता है। वहां भी गावों के अंदर जिंदगी के तौर-तरीके बदले हैं। अब गांव के लोग भी चीजों की खरीदारी के लिए ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। आसपास के जनरल स्टोर्स से उन्हें इन चीजों की जल्द सप्लाई भी हो जाती है।
ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से जुड़ी और टोक्यो से चलने वाली वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके संवाददाता ने उत्तरी प्रांत हेइलोंगजियांग की काउंटी (जिला) छिनगांग का दौरा किया। इस काउंटी को पिछले साल ही गरीब इलाकों की सूची से हटाया गया था। संवाददाता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस काउंटी के गांवों में आम लोगों की गरीबी घटी है। इसके बावजूद अगर शहरों में रहने वाले लोगों से तुलना करें, तो दोनों जगहों के आम लोगों आमदनी में गैर-बराबरी और बढ़ गई है। गांवों में अब भी आर्थिक अवसर सीमित ही हैं।
गौरतलब है कि चीन सरकार ने 2016 से 2020 के बीच ग्रामीण गरीबों को सहायता देने में 83 अरब डॉलर खर्च किए। उसके बाद पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एलान किया था कि आखिरी बची काउंटी को भी अब चरम गरीबी की सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने दावा किया था कि अब गांवों में भी प्रति व्यक्ति सालाना आय चार हजार युवान (625 डॉलर) से ज्यादा हो गया है। चीन में गरीबी की यही सीमा तय है।
लेकिन हकीकत यह है कि चीन के शहरों की तुलना में गांव के लोगों की आमदनी में गिरावट आई है। गांवों में जिंदगी अब भी शहरों की तुलना में बहुत मुश्किल भरी है। सूअर पालन करने वाले एक किसान ने वेबसाइट निक्कईएशिया के संवाददाता से कहा- ‘पिछले कुछ सालों में हमारी जिंदगी पहले से बेहतर हुई है। लेकिन यह अभी भी संघर्षपूर्ण है।’ किसान ने बताया कि उसके परिवार की सालाना आमदनी 30 हजार युवान ही है, जिसमें पांच युवान मिडल स्कूल में पढ़ रही बेटी की पढ़ाई पर खर्च करना पड़ता है। उसके बाद बचत की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
जानकारों का कहना है कि गांवों में कारोबार के अवसर सीमित हैं। इसलिए किसानों की आमदनी नहीं बढ़ रही है। चीन की शहरी आबादी 90 करोड़ है। 50 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2020 में शहरों के लोगों की औसत आमदनी सालाना 43,834 युवान थी। ग्रामीणों की औसत आय तब महज 17,131 युवान थी। 2013 के बाद ग्रामीणों की औसत में 82 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। शहरों में ये बढ़ोतरी 57 फीसदी रही। लेकिन इन सात वर्षों की अवधि के बाद दोनों जगहों के लोगों की औसत आमदनी के बीच 57 फीसदी का फर्क बना रहा।
जानकारों के मुताबिक गांवों में कृषि के अलावा रोजगार के अवसर कम ही हैं। कृषि में विकास दर धीमी है। इसीलिए गांवों से बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में शहरों की तरफ जा रहे हैं। शहरों में प्रवासी मजदूरों की आमदनी भी गांव में रहने वाले किसानों की तुलना में ज्यादा होती है। शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बेहतर है। इसलिए गांवों में गरीबी कम होने के बावजूद लोगों में वहां रहने का आकर्षण पैदा नहीं हुआ है।