नई-नई वैक्सीन के लिए रहें तैयार
हरेक स्ट्रेन के लिए अलग-अलग वैक्सीन की जरूरत पड़ती है। इन नए स्ट्रेन को ध्यान में रखते हुए ही वैज्ञानिक वैक्सीन बनाते हैं। इसके बावजूद सालभर सक्रिय रहने वाले वायरस के भिन्न-भिन्न स्ट्रेन पर वैक्सीन आंशिक प्रभाव ही दिखा पाती है। अगर ऐसा कोरोना के मामले में भी होता है तो शोधकर्ताओं को नई-नई वैक्सीन बनाने के लिए तैयार रहना होगा।
प्रतिरक्षा के अभाव में ज्यादा बदलाव नहीं
वैसे वैज्ञानिकों का मानना है कि फिलहाल इस वायरस के खिलाफ लोगों में व्यापक प्रतिरक्षा मौजूद नहीं है। लिहाजा, वायरस को टिके रहने के लिए ज्यादा बदलावों की जरूरत नहीं है। अगर म्यूटेशन से एंटीजन का आकार बदलता भी है तो वह ज्यादा स्थायी नहीं होगा। लेकिन जिस दिन लोगों में कोरोना के प्रभावी स्ट्रेन के खिलाफ प्रतिरक्षा आ जाएगी, तब इसके नए स्ट्रेन बनने की आशंकाएं बढ़ जाएंगी।
वैक्सीन के बाद दिख सकता है जीनोम में बदलाव
वैज्ञानिक के मुताबिक, वायरस म्यूटेट कर रहा है। जॉन हॉपकिंस अप्लायड फिजिक्स लेबोरेट्री में मॉलिक्युलर बायोलॉजिस्ट डॉ. पीटर थिएलेन का कहना है हजारों सैंपलों में 11 प्रकार के म्यूटेशन सामान्य पाए गए हैं। लेकिन अभी दुनियाभर में इसकी एक ही स्ट्रेन मौजूद है।
इसके स्पाइक प्रोटीन में बहुत कम तब्दीली आई है, लिहाजा यह अपना स्वरूप बहुत ज्यादा नहीं बदलेगा। थिएलेन का कहना है कि अभी यह पूरी तरह नहीं बताया जा सकता कि वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद कोरोना के जीनोम में किस तरह बदलाव आएगा। इसलिए हम इस पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।