चीन की राजधानी बीजिंग से एक बड़ी खबर आ रही है। शुक्रवार को यहां एक छोटा खेल विमान एक बहुत ऊंची इमारत से टकरा गया। यह विमान बीजिंग की सबसे ऊंची इमारत 'सिटिक टॉवर' से टकराया। इस टक्कर के बाद पूरी बिल्डिंग में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने तुरंत इस इमारत को खाली कराया।
इस हादसे में कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। विमान में कितने लोग सवार थे, यह भी साफ नहीं है। विमान के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए हैं। चीनी अधिकारियों ने इस घटना पर अभी कोई बयान नहीं दिया है। चीनी सोशल मीडिया से इस हादसे से जुड़े पोस्ट भी तुरंत हटा दिए गए।
इमारत से टकराया प्लेन और गिरने लगा मलबा
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं। इनमें दिख रहा है कि विमान 528 मीटर ऊंचे टॉवर के ऊपरी हिस्से से टकराया। टक्कर होते ही विमान के टुकड़े नीचे सड़क पर गिरने लगे। मलबे के कुछ हिस्से पास के पार्क में भी गिरे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
वहां काम करने वाली एक महिला ने बताया कि उन्हें शाम ठीक छह बजे बाहर निकाला गया। वे इतनी डर गईं कि अपना बैग और आईडी कार्ड भी अंदर ही भूल गईं। पास की बिल्डिंग में काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि उन्होंने भी एक जोरदार आवाज सुनी थी।
यह भी पढ़ें: ट्रंप के पूर्व NSA बोल्टन ने कबूला जुर्म: जेल जाने से बचने के लिए वकीलों से की डील, 28 अक्तूबर को सजा पर फैसला
मौके पर भारी पुलिस बल और एम्बुलेंस तैनात
हादसे के बाद बीजिंग पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने घटनास्थल की तरफ जाने वाली सभी सड़कें बंद कर दी हैं। वहां जुटी भीड़ को भी हटा दिया गया है। इस समय सिटिक टॉवर के चारों तरफ भारी पुलिस बल तैनात है। इमारत के पास कई एम्बुलेंस भी खड़ी हैं।
विमान के मलबे की कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर देखी गई हैं। इस विमान का रजिस्ट्रेशन नंबर B-12PP है। रिकॉर्ड के अनुसार, यह 'सनवर्ड SA60L ऑरोरा' विमान है। यह दो सीटों और एक इंजन वाला छोटा विमान है। इसे चीन की ही एक कंपनी बनाती है।
कड़े नियमों के बावजूद हुआ हादसा
दावा किया जा रहा है कि इस विमान को एक स्थानीय कंपनी उड़ा रही थी। यह कंपनी लोगों को पायलट की ट्रेनिंग देती है। यह कंपनी हवाई सैर भी कराती है। शुक्रवार रात को इस कंपनी से संपर्क नहीं हो सका।
बीजिंग में इस तरह का छोटा विमान उड़ाना बहुत मुश्किल है। इसके लिए चीन की सेना और नागरिक उड्डयन विभाग से बहुत सख्त मंजूरी लेनी पड़ती है। पिछले महीने ही सरकार ने यहां बिना मंजूरी ड्रोन या विमान उड़ाने पर पूरी तरह रोक लगाई थी। ऐसे में यह हादसा कैसे हुआ, इसकी जाँच की जा रही है।