जयशंकर पर रूस को प्रतिबंधित करने के लिए दबाव बनाएंगे पश्चिमी देश
जी-20 देशों की यहां होने वाली बैठक में एक-दूसरे से विभिन्न मुद्दों पर मतभेद रखने वाली महाशक्तियां आमने-सामने होंगी। यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला मौका होगा, जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव दुनिया की आर्थिक महाशक्तियों के सामने पहुंचेंगे।
उधर, अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देश यूक्रेन युद्ध के दुष्परिणामों के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर और प्रतिबंध लगाने के लिए वातावरण बनाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए उनकी रणनीति बैठक में पहुंच रहे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर दबाव बनाने की होगी।
विभिन्न मंचों पर रूस पर प्रतिबंध के बाद उसके विदेश मंत्री लावरोव के जी-20 बैठक में पहुंचने के कारण पहले ही बाली का माहौल खासा गर्म है। मेजबान इंडोनेशिया सदस्य देशों के बीच मध्यस्थता के प्रयास में जुटा है। जी-20 में शामिल पश्चिमी देश रूस पर यूक्रेन में युद्ध अपराधों का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन भारत, चीन, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका इससे इत्तफाक नहीं रखते।
बैठक से पहले जर्मन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्रिश्चियन वेगनर ने कहा, यह सामान्य बैठक नहीं होगी। इसमें कामकाज भी पहले की तरह नहीं हो पाएगा। जर्मनी औद्योगिक देशों के समूह जी-7 का अध्यक्ष है और यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर बाली में लावरोव के साथ होने वाले व्यवहार के निर्धारण में भूमिका निभाएगा।
वित्त मंत्रियों की बैठक से किया था बहिर्गमन
इससे पहले अप्रैल में जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक वाशिंगटन में हुई थी। वहां रूसी प्रतिनिधियों की मौजूदगी के खिलाफ ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका ने बहिर्गमन किया था। अब बाली बैठक से इतर अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन का चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मिलने का कार्यक्रम है, लेकिन रूसी विदेश मंत्री लावरोव से उनकी भेंट नहीं होगी।